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SHREE SHARMA

18 hours ago

ज्ञानवर्धक श्लोक १. श्लोक - मूर्ख की पहचान काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम्। व्यसनं च मूर्छानां निद्रया झगडेन वा॥ • अर्थ: बुद्धिमान लोगों का समय अच्छे साहित्य, शास्त्रों की चर्चा और उनके आनंद में व्यतीत होता है, जबकि मूर्खों का समय बुरी आदतों (व्यसन), अधिक सोने में या फिर बिना वजह झगड़ा करने में बीतता है। २. श्लोक - क्षुधा या भूख से प्रेरित पाप बुभुक्षितः किं न करोति पापं क्षीणा जना निष्करुणा भवन्ति। • अर्थ: अत्यधिक भूखा व्यक्ति कौन सा पाप नहीं करता? अर्थात् भूख से व्याकुल होकर मनुष्य नीच कर्म भी कर बैठता है और कमज़ोर या कष्ट में पड़े लोग अक्सर दयारहित (निर्दयी) हो जाते हैं। ३. श्लोक - विद्या का महत्त्व यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम्। लोचनाभ्यां विहीनस्य दर्पणः किं करिष्यति॥ • अर्थ: जिस व्यक्ति के पास स्वयं की समझ या बुद्धि नहीं है, उसका शास्त्र और ज्ञान क्या भला करेंगे? जिस प्रकार आँख से हीन (अंधे) व्यक्ति के लिए दर्पण (शीशा) बिल्कुल व्यर्थ है, उसी तरह बिना बुद्धि के शास्त्र किसी काम के नहीं। ४. श्लोक - पञ्चतन्त्र का अंतिम श्लोक मन्त्रे, तीर्थे, द्विजे, देवे, दैवज्ञे, भेषजे, गुरौ। यादृशी भावना यस्य सिद्धिर्भवति तादृशी॥ • अर्थ: मंत्र में, तीर्थ स्थान में, ब्राह्मण (द्विज) में, देवता में, भविष्यवक्ता (दैवज्ञ) में, औषधि में और गुरु में—मनुष्य की जैसी श्रद्धा और भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि (फल) प्राप्त होती है।

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Comments (2)

Gori 🕉️🌿 शंकराय नमः

Gori 🕉️🌿 शंकराय नमः

Oct 26, 2026

🙏🏻हर हर महादेव 🕉️