
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
7 days ago
. *॥■○ स्कंद माता ○■॥* नवरात्रों में दिवस पांचवें, स्कंदमात की पूजा है। दिव्य अलौकिक शोभा माँ की, रूप न कोई दूजा है॥ पर्वतराज हिमालय पुत्री, पार्वती कहलाती है। कुमार स्कंद की जननी माँ, स्कंद मात कहलाती है॥ स्कंद नाम जो कार्तिकेय का, पार्वती से प्रशिक्षित है। शुभ्र श्वेत है रूप माँ का, आसन कमल विराजित है॥ जगतितल जीवों में चेतना, स्कंद मात ही भरती है। सकल चराचर के कष्टों को, स्कंद मात ही हरती है॥ कुमार स्कंद का बालरूप, माँ की गोद विराजित है। केहरि वाहन वर मुद्रा में, पुष्प कमल पर शोभित है॥ सूर्य मंडल की अधिष्ठात्री, रूप चतुर्भुज धारी है। ऊंचे पर्वत रहने वाली, करती सिंह सवारी है॥ माँ का साधक तेज कांतिमय, जीवनी शक्ति पाता है। पावन मन से करे साधना, साधक भव तर जाता है॥ मात कृपा से अज्ञानी भी, परम ज्ञान को पाता है। मां की दया से कालीदास, काव्य सृजन कर पाता है॥ चेजारा' तू कर आराधन, माँ का ध्यान लगाए जा। गीत नवल रचकर माँ का तू, ध्यान लगाकर गाए जा॥
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