
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
167 days ago
हनुमान जी के चरणों को स्पर्श करने या न करने को लेकर समाज में अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं। मुख्य रूप से इसके पीछे के कारणों को इस प्रकार समझा जा सकता है: 1. ब्रह्मचर्य की मर्यादा हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी माना जाता है। हिंदू धर्म की कुछ परंपराओं और विशेष रूप से कुछ मंदिरों के नियमों के अनुसार, महिलाएं उनके चरणों का स्पर्श नहीं करती हैं। यह हनुमान जी के प्रति सम्मान और उनके कठोर ब्रह्मचर्य व्रत की मर्यादा बनाए रखने के लिए किया जाता है। हालांकि, पुरुष सामान्यतः उनके चरण स्पर्श कर सकते हैं। 2. 'दास भाव' की भक्ति हनुमान जी स्वयं को भगवान श्री राम का सबसे बड़ा सेवक या दास मानते हैं। भक्त जब हनुमान जी की पूजा करते हैं, तो वे उन्हें एक 'रक्षक' या 'गुरु' के रूप में देखते हैं। कई बार भक्त उनके प्रति इतनी श्रद्धा रखते हैं कि वे उनके चरणों को छूने के बजाय उनके सामने सिर झुकाना या साष्टांग प्रणाम करना अधिक उचित समझते हैं। 3. विग्रह (मूर्ति) की सुरक्षा और पवित्रता सिंदूर चढ़े हुए हनुमान जी की मूर्तियों पर लेप लगा होता है। बार-बार स्पर्श करने से मूर्ति का क्षरण हो सकता है या सिंदूर हाथों में लग सकता है। इसलिए, कई मंदिरों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल पुजारी को ही स्पर्श की अनुमति होती है और भक्तों को दूर से दर्शन करने की सलाह दी जाती है। 4. शास्त्रों का दृष्टिकोण शास्त्रों में कहीं भी हनुमान जी के चरण स्पर्श करने की मनाही नहीं है। हनुमान चालीसा में भी लिखा है: > "अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा" और "रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।" > भगवान राम ने स्वयं उन्हें गले लगाया था। इसलिए, भक्ति भाव सबसे ऊपर है। यदि आप पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ उनके चरणों को प्रणाम करते हैं, तो इसमें कोई दोष नहीं माना जाता।
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