
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
237 days ago
5.1.2026 आपने एक भजन सुना होगा, जिसमें बहुत सुंदर बात कही गई है, *"पुरुषार्थ ही इस दुनिया में सब कामना पूरी करता है, मनचाहा फल उसने पाया, जो आलसी बनके पड़ा न रहा।"* इस सुंदर बात के अनुसार *"यदि कोई व्यक्ति सही दिशा में कदम उठाए। और बुद्धिमत्ता पूर्वक पूर्ण पुरुषार्थ करे, तो उसका वह कदम उसे सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाएगा।"* कभी-कभी अपवाद रूप से उसमें कुछ-कुछ बाधाएं भी आ सकती हैं। उन अपवादों को छोड़कर सामान्य नियम यही है, कि *"बुद्धिमत्ता से योजना बनाएं और कार्य सिद्धि के लिए जितने साधन = धन संपत्ति नौकर चाकर आदि आवश्यक होते हैं, वे सब साधन भी जुटाएं। और फिर सावधानी रखते हुए पूर्ण पुरुषार्थ करें।" "फिर तो बहुत संभावना है, कि आप जीवन में बहुत ऊंची उन्नति कर जाएंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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