
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
209 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 02 फरवरी 2026* *⛅दिन - सोमवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - शिशिर* *⛅मास - फाल्गुन* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - प्रतिपदा रात्रि 01:52 फरवरी 03 तक तत्पश्चात् द्वितीया* *⛅नक्षत्र - अश्लेशा रात्रि 10:47 तक तत्पश्चात् मघा* *⛅योग - आयुष्मान् प्रातः 07:21 तक, तत्पश्चात् सौभाग्य प्रातः 04:46 फरवरी 03 तक, तत्पश्चात् शोभन* *⛅राहुकाल - सुबह 08:30 से सुबह 09:54 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 07:07* *⛅सूर्यास्त - 06:15 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:24 से प्रातः 06:15 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 03 से रात्रि 01:06 फरवरी 03 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - फाल्गुन प्रारम्भ(उत्तर), इष्टि* *🌥️विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🔹यज्ञ के समय ध्यान रखने योग्य बातें🔹* *🔸यज्ञ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है :* *१] याजक को यज्ञ करते समय सिले हुए चुस्त कपड़े नहीं पहनने चाहिए, खुले कपड़े पहनने चाहिए ताकि यज्ञ का जो वातावरण या सात्त्विक धुआँ है वह रोमकूपों पर सीधा असर करे ।* *२] अग्नि की ज्वाला सीधी आकाश की तरफ जाती है अत: यज्ञमंडप के ऊपर छप्पर होना चाहिए ताकि यज्ञ की सामग्री का जो प्रभाव है वह सीधा ऊपर न जाय, आसपास में फैले ।* *३] यज्ञ में जो वस्तुएँ डाली जाती हैं उनके लाभकारी रासायनिक प्रभाव को उत्पन्न करने में जो लकड़ी मदद करती है वैसी ही लकड़ी होनी चाहिए । इसलिए कहा गया है : ‘अमुक यज्ञ में पीपल की लकड़ी हो.... अमुक यज्ञ में आम की लकड़ी हो....’ ताकि लकड़ियों का एवं यज्ञ की वस्तुओं का रासायनिक प्रभाव वातावरण पर पड़े ।* ▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬ 🚩जय श्री राम🚩 🚩धर्मो रक्षति रक्षितः 🇮🇳हिन्दू राष्ट्र भारत

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