
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
4 days ago
जय श्री राम जी 🙏 आपने रामचरितमानस के मोती। ये 7 चौपाइयाँ नहीं, जीवन जीने के 7 सूत्र हैं। 1. होइहि सोइ जो राम रचि राखा। *को करि तर्क बढ़ावै साखा॥* *अर्थ:* भगवान श्रीराम ने पहले से जो रच रखा है, वही होकर रहता है। मनुष्य व्यर्थ में तर्क करके अपना मन भ्रमित करता है। *विस्तार:* ये बालकांड की चौपाई है। शिव जी पार्वती जी को समझा रहे हैं। हम दिन-रात चिंता करते हैं — क्या होगा? कैसे होगा? अगर ऐसा हो गया तो? पर तुलसीदास जी कहते हैं, तुम्हारी चिंता से भविष्य नहीं बदलता। जो होना है वो राम की योजना में तय है। जैसे चित्र में एक व्यक्ति सिर पकड़ कर चिंतित बैठा है और दूसरा हाथ जोड़कर शांत है — दोनों के पीछे राम जी खड़े हैं। फर्क सिर्फ समर्पण का है। तर्क छोड़ो, राम पर भरोसा रखो। तुम्हारा काम कर्म करना है, परिणाम की रचना राम करेंगे। 2. रामहि केवल प्रेमु पिआरा। *जानि लेउ जो जान निहारा॥* *अर्थ:* भगवान राम को केवल सच्चा प्रेम प्यारा है। जो इस सत्य को समझ लेता है वही ज्ञानी है। *विस्तार:* राम जी को ना सोने का महल चाहिए, ना 56 भोग। शबरी के झूठे बेर क्यों खाए? केवट की नाव में क्यों बैठे? क्योंकि वहाँ प्रेम था। आज लोग मंदिर में बड़ा चढ़ावा, बड़ा दिखावा करते हैं, पर मन में अहंकार है। राम जी उस दिखावे को नहीं देखते। वो देखते हैं — दिल में प्रेम है या नहीं। आप गरीब हो, अनपढ़ हो, अगर आँख में आँसू और दिल में सच्चा प्रेम है तो राम आपके हैं। यही सबसे बड़ा ज्ञान है। 3. जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू। *सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥* *अर्थ:* जिसका जिस पर सच्चा प्रेम होता है, वो उसे अवश्य प्राप्त होता है — इसमें कोई संदेह नहीं। *विस्तार:* ये प्रेम का अटल नियम है। ये सिर्फ भगवान के लिए नहीं, जीवन के हर रिश्ते के लिए है। अगर आपका प्रेम सच्चा है, निस्वार्थ है, तो भगवान को भी आना ही पड़ता है। जैसे मीरा के लिए कृष्ण आए, शबरी के लिए राम आए। चित्र में भक्त ध्यान में है और पीछे राम जी स्वयं खड़े होकर आशीर्वाद दे रहे हैं। आपका सच्चा प्रेम कभी खाली नहीं जाता। वो घूम-फिर कर आपके पास ही आता है। 4. मंगल भवन अमंगल हारी। *द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी॥* *अर्थ:* हे दशरथ जी के आँगन में खेलने वाले राम! आप मंगल के धाम हैं और अमंगल को हरने वाले हैं। मुझ पर कृपा करें। *विस्तार:* ये तो रामचरितमानस की सबसे प्रिय चौपाई है। मंगल मतलब शुभ, पवित्र, अच्छा। अमंगल मतलब दुख, रोग, डर, पाप। तुलसीदास जी कहते हैं — राम जी का नाम ही मंगल है। जहाँ राम हैं वहाँ कोई अमंगल टिक ही नहीं सकता। जैसे बालक राम आँगन में घुटनों चल रहे हैं और माता कौशल्या निहार रही हैं — वैसे ही जब राम हमारे हृदय के आँगन में खेलने लगते हैं, तो सारे अमंगल अपने आप भाग जाते हैं। सुबह-शाम इस चौपाई को जपने से घर में शांति आती है। 5. जपहिं नामु जन आरत भारी। *मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी॥* *अर्थ:* जो व्यक्ति अत्यंत दुख में भी भगवान का नाम जपता है, उसके सारे संकट दूर हो जाते हैं और वो सुखी हो जाता है। *विस्तार:* यहाँ 'आरत' शब्द बहुत गहरा है। आरत मतलब जिसके पास कोई रास्ता न बचा हो, जो पूरी तरह टूट चुका हो। भगवान को आपका सुख नहीं, आपका टूटा हुआ दिल ज्यादा प्रिय है। जब आप रोते-रोते भी 'हे राम' कहते हो, तो राम जी दौड़े चले आते हैं। जैसे चित्र में व्यक्ति पर काले बादल (संकट) हैं, पर वो हाथ जोड़े हुए है और पीछे से राम जी की रोशनी आ रही है। नाम जप टॉर्च की तरह है — अंधेरे को गाली देने से अंधेरा नहीं जाता, दीया जलाने से जाता है। 6. दीन दयाल बिरदु संभारी। *हरहु नाथ मम संकट भारी॥* *अर्थ:* हे दीनों पर दया करने वाले प्रभु! अपने बिरद (प्रण) को याद करके मेरे भारी संकटों को दूर करो। *विस्तार:* भगवान का बिरद क्या है? — 'दीन दयाल'। वो दीनों पर दया करते हैं, ये उनका वादा है। तुलसीदास जी भगवान को उनका वादा याद दिला रहे हैं। जैसे वकील जज को कानून दिखाता है, वैसे भक्त भगवान को उनका बिरद दिखाता है — "प्रभु, आप तो दीनदयाल हो, फिर मुझ दीन को क्यों भूल गए?" ये शिकायत नहीं, अधिकार है। भक्त का भगवान पर अधिकार है। जब आप इस चौपाई से पुकारते हो, तो राम जी को अपना प्रण निभाने के लिए आना ही पड़ता है। 7. रामकथा सुन्दर कर तारी। *संशय बिहग उड़ावनहारी॥* *अर्थ:* श्रीराम की कथा सुंदर करतल ध्वनि (ताली) है, जो मन में बैठे संशय रूपी पक्षियों को उड़ा देती है और संसार सागर से पार करा देती है। *विस्तार:* हमारे मन में हजारों पक्षी बैठे हैं — शक, डर, चिंता, वहम — "क्





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