
SHREE SHARMA
57 days ago
प्रथम पंक्ति: भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शैया पर 'योग निद्रा' में लीन हैं। यहाँ योग निद्रा का अर्थ सामान्य नींद नहीं, बल्कि वह अवस्था है जिसमें प्रभु बाहरी जगत से बेखबर होकर भी ब्रह्मांड के हर कण पर दृष्टि रखते हैं। शेषनाग के फणों की छाया उनके मस्तक पर है, जो उनकी शीतलता और सुरक्षा का प्रतीक है। द्वितीय पंक्ति: भक्त कहता है कि दुनिया के तमाम तीर्थ स्थलों की यात्रा करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि संसार के समस्त पवित्र तीर्थ और पुण्य स्थल भगवान विष्णु के चरणों में ही समाहित हैं। जिस प्रकार गंगा जी का उद्गम विष्णु जी के चरणों से माना जाता है, उसी प्रकार समस्त पवित्रता का केंद्र उनके चरण ही हैं।


