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16.9.2026 ईश्वर का मुख्य नाम ओ३म् है। इसका अर्थ है *"सबकी रक्षा करने वाला।"* ईश्वर सबका रक्षक है। कैसे? "बुरा काम करते समय सबको मन में सूचित करता है, कि *"यह काम बुरा है, इसे मत करो।"* इसकी सूचना का स्वरूप यह होता है, कि *"व्यक्ति को अपने मन में भय शंका लज्जा की अनुभूति होती है। इस प्रकार से ईश्वर हमारी रक्षा करता है, और हमें बुराई से बचाता है।"* ऐसे ही जब कोई व्यक्ति अच्छा काम करने की योजना बनाता है, तो ईश्वर उसे मन में सूचित करता है, कि *"यह काम अच्छा है, इसे कर लो।" इसकी सूचना का रूप यह होता है, कि उस व्यक्ति को मन में आनंद उत्साह निर्भयता का अनुभव होता है। यह ईश्वर द्वारा की गई रक्षा है।"* *"फिर भी यदि कोई बुरा काम करता है, तो ईश्वर बाद में उसको दंड देकर उसका सुधार करता है। और उसके बुरे काम से जिस व्यक्ति को नुकसान होता है, उसके नुकसान की पूर्ति करके ईश्वर उसकी रक्षा करता है।"* *"और इसके अतिरिक्त भी ईश्वर ने हम सबको शरीर मन बुद्धि इंद्रियां पंच महाभूत और तरह-तरह के फल फूल शाक सब्जी औषधि वनस्पति आदि धातुएं खनिज पदार्थ आदि सब कुछ देकर हमारी रक्षा की है।"* इसलिए इस ओ३म् परमात्मा का स्मरण धन्यवाद उसकी स्तुति प्रार्थना उपासना प्रतिदिन दोनों समय करनी चाहिए। "ओ३म् नाम से ही उसका स्मरण करना चाहिए। लंबा करके ओ३म् शब्द का उच्चारण करें, और कहें कि "हे ईश्वर! आप सबके रक्षक हैं, हमारी भी रक्षा कीजिए।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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