
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
5 days ago
*जीवन के चार आधार स्तंभ * **सत्य (Truth):** सत्य ही वह नींव है जिस पर संपूर्ण ब्रह्मांड टिका है। जीवन में विचारों, वचनों और कर्मों में सच्चाई होना ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है। जैसा कि कहा गया है— *"सत्यमेव जयते"* (सत्य की ही जीत होती है)। * **धर्म (Duty & Righteousness):** यहाँ धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय से नहीं, बल्कि **कर्तव्य, नैतिकता और मानवता** से है। जो आचरण समाज को जोड़े, सबका कल्याण करे और सही मार्ग दिखाए, वही सच्चा धर्म है। * **कर्म (Action & Deed):** कर्म ही मनुष्य का भाग्य निर्धारित करता है। गीता में भी कहा गया है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, फल पर नहीं। निष्काम भाव से किया गया अच्छा कर्म ही जीवन को सार्थक बनाता है। * **मोक्ष (Liberation & Salvation):** यह जीवन और मरण के चक्र (आवागमन) से मुक्ति की अवस्था है। जब मनुष्य सभी बंधनों, मोह-माया और अज्ञान से ऊपर उठकर आत्मज्ञान प्राप्त कर लेता है, तब वह परम शांति यानी मोक्ष को प्राप्त होता है। > **सार:** सत्य के मार्ग पर चलते हुए, अपने धर्म (कर्तव्य) का पालन करते हुए, निष्काम भाव से श्रेष्ठ कर्म करना ही अंततः मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Oct 1, 2026
🙏🏹 Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏🏹

RAMESH PUNDEER
Oct 1, 2026
GOOD LINE🙏
