MyMandirInstall

हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा के पीछे एक बहुत ही सुंदर और भक्तिपूर्ण कथा प्रचलित है, जिसका वर्णन **रामचरितमानस** के संदर्भों में मिलता है। ### सिंदूर चढ़ाने की पौराणिक कथा एक बार हनुमान जी ने माता सीता को अपनी मांग में **नारंगी रंग का सिंदूर** लगाते हुए देखा। उनके मन में जिज्ञासा हुई और उन्होंने माता सीता से पूछा, "हे माता! आप अपने माथे पर यह लाल द्रव्य क्यों लगा रही हैं?" माता सीता ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, "पुत्र, इसे लगाने से मेरे स्वामी **प्रभु श्री राम की आयु लंबी होगी** और वे मुझसे प्रसन्न रहेंगे।" हनुमान जी, जो श्री राम के परम भक्त थे, उन्होंने सोचा कि यदि चुटकी भर सिंदूर लगाने से प्रभु की आयु बढ़ती है और वे प्रसन्न होते हैं, तो यदि मैं अपने **पूरे शरीर पर सिंदूर** लगा लूं, तो प्रभु अमर हो जाएंगे और मुझ पर सदैव अपनी कृपा बनाए रखेंगे। इसी भाव के साथ हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर मल लिया और सभा में पहुंच गए। उनकी ऐसी निश्छल भक्ति देखकर श्री राम अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने वरदान दिया कि: > "जो भी भक्त हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करेगा, उस पर मेरी विशेष कृपा रहेगी और उसके सभी कष्ट दूर होंगे।" > ### सिंदूर चढ़ाने के लाभ और महत्व 1. **ग्रह दोष से मुक्ति:** ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने से **मंगल दोष** और **शनि की साढ़े साती** या ढैया के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। 2. **सकारात्मक ऊर्जा:** सिंदूर को ऊर्जा और तेज का प्रतीक माना जाता है। इसे चढ़ाने से साधक के भीतर आत्मविश्वास और साहस की वृद्धि होती है। 3. **बाधाओं का निवारण:** माना जाता है कि चमेली के तेल के साथ सिंदूर (चोला) चढ़ाने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं टल जाती हैं। ### चढ़ाते समय ध्यान रखने योग्य बातें * हनुमान जी को हमेशा **नारंगी रंग का सिंदूर** (जिसे 'सिंदूर' या 'बजरंगी चोला' भी कहते हैं) चढ़ाना चाहिए। * सिंदूर चढ़ाते समय अक्सर **चमेली के तेल** का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इसकी खुशबू और शुद्धता हनुमान जी को प्रिय मानी गई है। * सिंदूर चढ़ाते समय "ॐ हनुमते नमः" का जाप करना कल्याणकारी होता है।

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!