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“कर्ण और दुर्योधन की दिव्य दोस्ती” अगर कर्ण ने उस दिन दोस्ती को न चुना होता तो आज महाभारत का दृश्य कुछ और होता। दुर्योधन का मनोबल टूट जाता, कुरुक्षेत्र का रुख बदल जाता। न अर्जुन पर धर्मसंकट आता, न श्रीकृष्ण से वो गीता का ज्ञान पाता। चाहे कर्ण और दुर्योधन राजपाट नहीं जीते, लेकिन इतिहास के पन्नों में उनकी दोस्ती हमेशा के लिए अमर हो गयी।

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R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Aug 2, 2026

परम मित्र मित्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏