
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
72 days ago
18.8.2026 *"वेदों के अनुसार समाज में चार वर्गों के लोग होते हैं। ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र। शूद्र का अर्थ अछूत नहीं है। इसका अर्थ है जो श्रमिक वर्ग है = labour class उसको शूद्र कहते हैं। इन सबकी योग्यता अलग-अलग प्रकार की होती है, इसलिए समाज को चार वर्गों में वेद ने बांटा है। वेदों के अनुसार यह चारों वर्ग जन्म से नहीं, बल्कि गुण कर्म योग्यता से माने जाते हैं।"* *"इनमें से ब्राह्मण वैश्य और शूद्र इन तीन के लिए अहिंसा की परिभाषा इस प्रकार से है। मन में किसी भी प्राणी से द्वेष न करना, वाणी से बिना कारण किसी को दुख नहीं देना, बल्कि सभ्यता से अच्छी मीठी भाषा बोलना। शरीर से दूसरों पर अत्याचार नहीं करना धक्का मुक्की मारा मारी नहीं करना, न्याय पूर्वक सबके साथ अच्छा व्यवहार करना, हो सके तो दूसरों को सुख देना, यह अहिंसा की परिभाषा है। यह तीन वर्गों पर लागू होती है।"* *"क्षत्रियों पर लागू होने वाली अहिंसा की परिभाषा इससे कुछ अलग है। उसको जानने के लिए कल तक प्रतीक्षा करें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (1)

Savita om namah shivay 🙏🌹
Aug 18, 2026
RADHE RADHE 🙏🌹
