
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
100 days ago
22.5.2026 *"सुखी होने के लिए व्यक्ति का शरीर और मन दोनों स्वस्थ होने चाहिएं, तभी व्यक्ति सुख पूर्वक जीवन जी सकता है।"* अब संसार में अनेक घटनाएं होती रहती हैं, अच्छी भी और बुरी भी। *"जब बुरी घटनाएं होती हैं तब व्यक्ति दूसरों के साथ झगड़ा करता है। उससे उसकी मानसिक शांति खो जाती है। मन में चिंता और तनाव बढ़ जाते हैं।"* *"दूसरी ओर यदि व्यक्ति झगड़ा न करे, प्रेम से रहे, दुष्टों से बचकर रहे, दूर रहे, तो मन की शांति बनी रहती है। इस प्रकार से यदि मन शांत रहे, तो व्यक्ति का शरीर भी स्वस्थ रहता है। खाना पीना पढ़ना लिखना व्यापार नौकरी करना ईश्वर का ध्यान करना आदि सब कार्यों में उसका मन लगता है। तब वह सुख पूर्वक जीवन जी सकता है।"* *"और यदि लड़ाई झगड़ा करे, तो शरीर और मन दोनों रोगी हो जाते हैं। और फिर व्यक्ति तनाव युक्त जीवन जीता है। तब जीवन का पूरा लाभ नहीं हो पाता।"* इसलिए सब प्रकार से सुखी होने के लिए व्यक्ति को मन और शरीर से स्वस्थ होना आवश्यक है। और उसका उपाय यही है, कि *"व्यक्ति झगड़ों से दूर रहे, प्रेम और शांति से से जीवन जीए, तो ही वह सुखी हो सकता है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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