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MKU (एमकेयू) कानपुर की एक ऐसी कंपनी है जिसने तालों के कारोबार से शुरू होकर दुनिया की टॉप डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनियों में अपनी जगह बनाई है। यह "मेक इन इंडिया" की एक बहुत बड़ी मिसाल है। यहाँ इसके सफर और विस्तार की मुख्य जानकारी दी गई है: शुरुआत और कामयाबी का सफर * ताले से डिफेंस तक: MKU की शुरुआत 1985 में कानपुर में एक ताला बनाने वाली कंपनी (M. Kumar Udyog) के रूप में हुई थी। * कारगिल युद्ध का मोड़: कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान आया। जब भारतीय सेना को बर्फीले इलाकों के लिए खास जूतों की सख्त जरूरत थी, तब MKU ने बिना किसी मुनाफे के हजारों जोड़ी जूते सेना को उपलब्ध कराए। इसके बाद कंपनी का विजन पूरी तरह डिफेंस सेक्टर की ओर मुड़ गया। * टेक्नोलॉजी में निवेश: कंपनी ने केवल सामान नहीं बनाया, बल्कि जर्मनी की AST GmbH जैसी कंपनी का अधिग्रहण किया, जिससे उनके पास दुनिया की बेहतरीन आर्मर (कवच) टेक्नोलॉजी आ गई। आज यह कंपनी बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट, नाइट विजन डिवाइस और हेलीकॉप्टर-जहाजों के लिए कवच बनाती है। ग्लोबल विस्तार (कितने देशों में है?) MKU आज एक वैश्विक ब्रांड बन चुका है: * 100+ देश: कंपनी के उत्पाद दुनिया के 100 से अधिक देशों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। * 230+ बल: दुनिया भर की 230 से ज्यादा सेनाएं, पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियां (जैसे संयुक्त राष्ट्र और NATO) इनके सुरक्षा उपकरणों पर भरोसा करती हैं। * ग्लोबल नेटवर्क: इनके मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और रिसर्च सेंटर भारत के साथ-साथ जर्मनी में भी हैं। हाल ही में इन्होंने सऊदी अरब जैसे देशों में भी बड़े जॉइंट वेंचर शुरू किए हैं। कारोबार और टर्नओवर * सालाना टर्नओवर: रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2024 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए MKU का रेवेन्यू लगभग ₹550 करोड़ से ₹750 करोड़ के बीच रहा है। * बड़े कॉन्ट्रैक्ट: हाल ही में (अक्टूबर 2025) भारत के रक्षा मंत्रालय ने सेना की राइफल्स के लिए नाइट विजन सिस्टम सप्लाई करने हेतु कंपनी के साथ ₹659 करोड़ का बड़ा करार किया है। * योगदान: कंपनी अब तक दुनिया भर में 30 लाख (3 मिलियन) से ज्यादा सैनिकों को सुरक्षा कवच प्रदान कर चुकी है। यह कंपनी न केवल कानपुर बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है क्योंकि यह विदेशों से तकनीक खरीदने के बजाय अपनी तकनीक पूरी दुनिया को बेच रही है।

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