
SHREE SHARMA
352 days ago
(((( इलेश्वर भगवान शिव )))) . कहते हैं कि एक बार भगवान शंकर देवी पार्वती के साथ वनविहार कर रहे थे। तभी उनके दर्शनों की इच्छा से कुछ ऋर्षिगण वहां पहुंचे। . भगवान शिव और देवी पार्वती उस समय प्रेमालाप में लीन थे। ऋर्षिगण को देखकर पार्वती लज्जित हो गईं। . पार्वती की यह दशा देख भगवान शिव ने उस वन को शाप देते हुए कहा- 'आज से जो पुरुष इस वन में प्रवेश करेगा, वह स्त्री हो जाएगा।' . तब से पुरुषों ने उस वन में जाना बंद कर दिया और वह स्थान अम्बिका वन नाम से प्रसिद्ध होकर शिव-पार्वती का सुरक्षित प्रणय-स्थल बन गया। . एक बार वैवस्वत मनु के पुत्र इल शिकार खेलते हुए उस वन में पहुंचे। तो वे एक सुंदर स्त्री में परिवर्तित हो गए। . उनका घोड़ा भी घोड़ी बन गया। स्त्री बनकर इल अत्यंत दुखी हुए और वन में भटकने लगे। . उस वन के निकट ही ऋषि बुध (जो बाद में बुध ग्रह बने) का आश्रम था। . स्त्री के रूप में इल वहां पहुंचे तो बुध उन पर मोहित हो गए। उन्होंने स्त्री बने इल का नाम ‘इला’ रख दिया और फिर दोनों ने प्रेम-विवाह कर लिया। . इला उसी आश्रम में बुध के साथ रहने लगीं। कुछ समय बाद इला ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम पुरुरवा रखा गया। . बुध के आश्रम में स्त्री बने इल को वर्षों बीत गए। एक दिन इला को दुखी देखकर उसके पुत्र पुरुरवा ने इसका कारण पूछा। . इला ने अपना परिचय देकर पुरुष से स्त्री बनने की सारी घटना बताई। . माता के दुःख निवारण का उपाय जानने के लिए पुरुरवा पिता बुध के पास गए। . तब बुध बोले- वत्स! मैं राजा इल के इला बनने की कथा भली-भांति जानता हूं। मैं यह भी जानता हूं कि भगवान शिव और देवी पार्वती के कृपा-प्रसाद से ही उनका उद्धार हो सकता है। . इसलिए तुम गौतमी गंगा नदी के तट पर जाकर उनकी आराधना करो। भगवान शिव और पार्वती सदा वहां विराजमान रहते हैं। वे अवश्य तुम्हारी इच्छा पूर्ण करेंगे। . पिता की बात सुनकर पुरुरवा बड़े प्रसन्न हुए। वे उस समय माता-पिता को साथ लेकर गौतमी के तट पर गए और वहां स्नान कर भगवान की स्तुति करने लगे। . उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर भोलेनाथ और देवी उमा के साथ साक्षात प्रकट हुए और उन्हें इच्छित वर मांगने को कहा। . पुरुरवा ने वर-स्वरूप इला को पुनः राजा इल बनाने की प्रार्थना की। . भगवान शिव बोले- वत्स! इल गौतमी गंगा में स्नान करने के बाद पुनः अपने वास्तविक रूप में परिवर्तित हो जाएंगे। यह कहकर वे अंतर्धान हो गए। . इला ने गौतमी गंगा में स्नान किया। स्नान के समय उनके शरीर से जो जल गिर रहा था, . इसके साथ ही इला का नारी सौंदर्य गंगा में मिल गया और वह जल नृत्या, गीता एवं सौभाग्य नाम की नदियों में बदलकर गंगा में आ मिला। . इससे वहां तीन पवित्र संगम हुए। तभी से वह स्थान इला तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। . यहां इलेश्वर नामक भगवान शिव की स्थापना भी हुई। माना जाता है इस तीर्थ में स्नान और दान करने सभी मनोरथ पूरे होते हैं। . 🩷🩷

Comments (8)

SHREE SHARMA
Sep 12, 2025
धन्यवाद जी🙏🌹🙏

hansu parjapti
Sep 12, 2025
parvati Pate har har Mahadev 🙏🕉️ namah shivay 🌹👏

Rama Devi Sahu
Sep 12, 2025
Bahut hi Sundar Prasanga 👌👌🙏 Bhagwan Bhole Nath ji ki Aashirwad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🌹🌹 Jai Ho...

anil dagar
Sep 12, 2025
HAR HAR MAHADEV JI

Rama Devi Sahu
Sep 12, 2025
🙏🔱🥀 Om Namah Shivay 🥀🔱🙏
