
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
147 days ago
नाम का सुमिरन करना एक अत्यंत प्रभावशाली आध्यात्मिक अभ्यास है। जब आप देखने, सुनने और जपने की इन तीन क्रियाओं को एक साथ जोड़ते हैं, तो एकाग्रता कई गुना बढ़ जाती है। इसे एक साथ करने के लिए आप इस विधि का पालन कर सकते हैं: 1. नाम को देखना (मानसिक दर्शन) अपनी आँखें बंद करें और अपने अंतर्मन में उस 'नाम' या 'मंत्र' के अक्षरों को स्पष्ट रूप से देखें। कल्पना करें कि वे अक्षर आपके हृदय में या आपके दोनों भोहों के बीच (आज्ञा चक्र पर) चमक रहे हैं। इसे 'मानसिक लेखन' भी कहा जाता है। 2. नाम को जपना (जीभ और मन) अपनी जीभ से मंत्र का उच्चारण करें। शुरुआत में आप इसे धीरे-धीरे बोलकर (वैखरी जप) कर सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसे बिना आवाज़ किए केवल मन में दोहराने का प्रयास करें। जप की गति ऐसी रखें जिससे लय बनी रहे। 3. नाम को सुनना (साक्षी भाव) यह सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। जब आप जप करें, तो अपना पूरा ध्यान उस ध्वनि पर लगा दें जो आपके भीतर गूँज रही है। बाहरी शोर को भूलकर केवल उस नाम की ध्वनि को 'सुनने' की कोशिश करें जिसे आप स्वयं जप रहे हैं। एक साथ अभ्यास करने का तरीका: * लय (Rhythm): साँस लेने और छोड़ने की क्रिया के साथ नाम को जोड़ लें। * सावधानी: यदि मन भटकने लगे, तो तुरंत अपना ध्यान फिर से अक्षरों को 'देखने' पर ले आएं। * फल: जब देखना, सुनना और जपना एक बिंदु पर मिल जाते हैं, तो मन पूरी तरह शांत हो जाता है और ध्यान की अवस्था स्वतः प्राप्त होने लगती है। यह अभ्यास एकाग्रता बढ़ाने और मानसिक शांति के लिए बहुत ही प्रभावशाली माना गया है।
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