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16.8.2026 *"सत्य और झूठ संसार में सदा से चलते आए हैं और आगे भी चलते रहेंगे।"* परंतु आश्चर्य की बात यह है, कि *"जब कोई व्यक्ति स्वयं झूठ बोलता है, तो उसे कोई कष्ट नहीं होता, बल्कि तब उसे बड़ा अच्छा लगता है। और वह सोचता है, कि "मैंने दूसरों को मूर्ख बना दिया." यह सोचकर बड़ा प्रसन्न होता है।"* परंतु यदि स्थिति इससे विपरीत हो, अर्थात जब कोई दूसरा व्यक्ति उसके साथ झूठ बोलता है, तो उसे यह पता लगते ही, कि *"मेरे साथ झूठ बोला गया है," तब उसे बहुत बुरा लगता है, बहुत कड़वा लगता है। बहुत गुस्सा आता है। और तब वह गुस्से में आकर जमीन आसमान एक करने की बात सोचता है। यह तो उचित नहीं है।"* यदि आप यह नहीं चाहते, कि *"दूसरा व्यक्ति आपके साथ झूठ बोले, तो आपको भी दूसरे के साथ झूठ नहीं बोलना चाहिए। सत्य ही बोलना चाहिए। यही सभ्यता है, यही मनुष्यता है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

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Comments (1)

सविता

सविता

Aug 16, 2026

bilkul sahi hai ji 👍