MyMandirInstall

सुप्रभात जी! आपका दिन भी अत्यंत मंगलमय और शुभ हो। भगवान श्री गणेश को 21 दूर्वा (दूब घास) अर्पित करने के पीछे पौराणिक कथा **अनलसुर** नामक दैत्य से जुड़ी हुई है। **अनलसुर वध की पौराणिक कथा** प्राचीन काल में अनलासुर (अनलसुर) नाम का एक भयंकर राक्षस था। 'अनल' का अर्थ अग्नि होता है; उसके मुख से भयंकर आग की लपटें निकलती थीं और वह संतों, ऋषियों तथा निर्दोष लोगों को जिंदा निगल जाता था। उसके आतंक से त्रस्त होकर सभी देवता भगवान शिव और माता पार्वती की शरण में पहुंचे। महादेव ने देवताओं को बताया कि अनलासुर का संहार केवल विघ्नहर्ता श्री गणेश ही कर सकते हैं। इसके बाद श्री गणेश ने उस दैत्य का सामना किया और संपूर्ण संसार की रक्षा के लिए अनलासुर को जीवित ही निगल लिया। **दूर्वा से शांत हुई पेट की जलन** अनलसुर को निगलने के बाद उसके अग्नि प्रभाव के कारण भगवान गणेश के पेट और शरीर में असहनीय जलन होने लगी। देवताओं ने कई प्रकार के शीतल उपाय किए, चंद्रमा की शीतलता और चंदन का लेप भी लगाया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। तब वहां उपस्थित कश्यप ऋषि ने **दूर्वा की 21 गांठें** (गांठदार तिनके) एकत्रित करके भगवान गणेश को खाने के लिए दीं। दूर्वा की तासीर अत्यंत शीतल होती है। जैसे ही श्री गणेश ने वह 21 दूर्वा खाईं, उनके पेट की जलन और बेचैनी पूरी तरह शांत हो गई। प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने कहा कि जो भी भक्त मुझे भक्तिभाव से 21 दूर्वा अर्पित करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी और उसे मेरा विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा। **21 की संख्या का आध्यात्मिक महत्व** गणपति जी को दूर्वा हमेशा जोड़े में (10 जोड़े यानी 20 दूर्वा, और एक दूर्वा का तिनका मिलाकर कुल 21) चढ़ाई जाती है। यह 21 की संख्या हमारे जीवन के 21 मूल तत्वों का प्रतीक मानी जाती है: * **5 ज्ञानेंद्रियां:** आंख, कान, नाक, जीभ, त्वचा * **5 कर्मेंद्रियां:** हाथ, पैर, वाणी, गुदा, उपस्थ * **5 महाभूत:** पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश * **5 प्राण:** प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान * **1 मन** जब हम 21 दूर्वा अर्पित करते हैं, तो इसका प्रतीकात्मक अर्थ होता है कि हम अपने इन सभी 21 तत्वों और अहंकार को भगवान गणेश के चरणों में समर्पित कर रहे हैं।

Comments (2)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Sep 2, 2026

ॐ गं गणपतेया नमः 🙏 सुप्रभात जी 🙏