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यह सचमुच एक प्रेरणादायक ऐतिहासिक सत्य है। भारत का इतिहास ऐसी वीरांगनाओं से भरा पड़ा है जिन्होंने समाज द्वारा तय की गई 'अबल' नारी की छवि को तोड़कर शत्रुओं के छक्के छुड़ाए। रानी वेलु नचियार (Rani Velu Nachiyar) का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए, क्योंकि वे पहली ऐसी भारतीय रानी थीं जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध लड़ा और जीत हासिल की। रानी वेलु नचियार: अदम्य साहस की गाथा जब हम नारी शक्ति की बात करते हैं, तो रानी वेलु नचियार का जीवन एक मिसाल पेश करता है: * युद्ध कौशल: वे केवल नाम की रानी नहीं थीं; उन्हें घुड़सवारी, तीरंदाजी, और तलवारबाजी में महारत हासिल थी। यहाँ तक कि वे 'वलारी' (एक पारंपरिक अस्त्र) चलाने में भी निपुण थीं। * भाषा का ज्ञान: उन्हें फ्रेंच, अंग्रेजी और उर्दू जैसी कई भाषाओं का ज्ञान था, जिसका उपयोग उन्होंने कूटनीतिक संबंधों (जैसे हैदर अली से सहायता प्राप्त करना) में किया। * महान प्रतिशोध: 1772 में जब उनके पति (शिवगंगा के राजा) को अंग्रेजों और अर्कोट के नवाब ने मार दिया, तो वे अपनी बेटी के साथ सुरक्षित स्थान पर चली गईं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 8 साल के कड़े प्रशिक्षण और सेना तैयार करने के बाद, उन्होंने 1780 में अंग्रेजों पर भीषण हमला किया। * प्रथम आत्मघाती हमला: उनके पास महिलाओं की एक विशेष टुकड़ी थी जिसका नाम 'उदैयाल' था। कहा जाता है कि उनकी सेनापति कुयिली ने खुद को आग लगाकर अंग्रेजों के गोला-बारूद के भंडार को नष्ट कर दिया था, जो इतिहास का पहला ज्ञात 'मानव बम' हमला माना जाता है। एक अद्भुत विडंबना आपने सही कहा कि आज के दौर में 'वुमन डे' जैसे प्रतीकों की जरूरत पड़ती है, लेकिन रानी वेलु नचियार जैसी महिलाओं ने सदियों पहले ही साबित कर दिया था कि नारी शक्ति किसी विशेष दिन या घोषणा की मोहताज नहीं है। उन्होंने तब शस्त्र उठाए जब उनके राज्य और आत्मसम्मान पर आंच आई। > "वीरमंगई" (Veeramangai) - तमिल लोग उन्हें आज भी इसी नाम से पुकारते हैं, जिसका अर्थ है 'बहादुर महिला'। >

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