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🌺 गणेश परिवार की सुंदर कथा 🌺 एक दिन कैलाश पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती अपने दोनों पुत्रों भगवान गणेश और कार्तिकेय के साथ बैठे थे। तभी चर्चा हुई कि दोनों पुत्रों में अधिक योग्य और बुद्धिमान कौन है। यह तय हुआ कि जो पहले पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर वापस आएगा, वही विजेता कहलाएगा। कार्तिकेय जी तुरंत अपने तेज़ मोर पर बैठकर दुनिया की यात्रा के लिए निकल पड़े। लेकिन गणेश जी शांत भाव से सोचने लगे। उनका वाहन छोटा मूषक था, इसलिए वे जानते थे कि वे गति में अपने भाई से आगे नहीं निकल सकते। तब गणेश जी ने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया। उन्होंने अपने माता-पिता शिव और पार्वती जी के चारों ओर तीन बार परिक्रमा की और हाथ जोड़कर बोले: ✨ “मेरे लिए मेरे माता-पिता ही पूरा संसार हैं। इनके चरणों में ही सभी लोक और सभी तीर्थ बसे हैं।” ✨ गणेश जी की यह बात सुनकर शिव-पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा: 🌸 “हे गणेश! तुमने अपनी बुद्धि, भक्ति और माता-पिता के प्रति सम्मान से हमें प्रसन्न कर दिया। आज से हर शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ और मंगल कार्य में सबसे पहले तुम्हारी पूजा होगी।” 🌸 तभी से भगवान गणेश को 🙏 प्रथम पूज्य 🙏 विघ्नहर्ता 🙏 सिद्धिदाता कहा जाने लगा। मान्यता है कि जो भी भक्त किसी कार्य की शुरुआत गणेश जी के नाम से करता है, उसके जीवन के विघ्न दूर होते हैं और कार्य सफल होते हैं। 🌺 सीख 🌺 माता-पिता का सम्मान सबसे बड़ा धर्म है बुद्धि और विनम्रता, शक्ति से श्रेष्ठ हैं परिवार ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है

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Comments (1)

Pannalal panchal

Pannalal panchal

May 13, 2026

श्री गणेशाय नमः