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🛕꧁ जय द्वारकाधीश꧂🛕 देवकी के वो 6 पुत्र, जिन्हें कंस ने जन्म लेते ही मार दिया था: कौन थे वे? 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 हम सभी जानते हैं कि कंस ने भगवान श्री कृष्ण की प्रतीक्षा में देवकी के 6 नवजातों का वध कर दिया था। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि उन मासूम शिशुओं का दोष क्या था? आखिर उन्हें यह कष्ट क्यों सहना पड़ा? इसके पीछे छिपी है ब्रह्मलोक से जुड़ी एक अद्भुत पौराणिक कथा। आइए जानते हैं उन 6 शिशुओं का रहस्य: ✨ श्राप और अहंकार की कहानी ब्रह्मलोक में छह देवता हुआ करते थे— स्मर, उद्रीथ, परिश्वंग, पतंग, क्षुद्र्मृत और घ्रिणी। ब्रह्मा जी के अति प्रिय होने के कारण उनमें अहंकार आ गया और एक बार उन्होंने अनजाने में ब्रह्मा जी का ही अनादर कर दिया। परिणाम: ब्रह्मा जी ने उन्हें पृथ्वी पर दैत्य वंश में जन्म लेने का श्राप दे दिया। क्षमा माँगने पर ब्रह्मा जी ने वरदान दिया कि दैत्य योनि में भी उन्हें अपने पूर्वजन्म का ज्ञान रहेगा। 🔥 हिरण्यकश्यप का क्रोध और दूसरा श्राप इन छहों ने अगले जन्म में असुर राज हिरण्यकश्यप के पुत्रों के रूप में जन्म लिया। पूर्वज्ञान होने के कारण उन्होंने कोई अधर्म नहीं किया, बल्कि ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की। ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान दिया कि: "तुम्हारी मृत्यु न देवताओं के हाथों होगी, न गंधर्वों के हाथों और न ही किसी बीमारी से।" अपने पुत्रों को देवताओं की भक्ति करते देख पिता हिरण्यकश्यप क्रोधित हो उठा और उसने श्राप दिया— "तुम्हारी मृत्यु किसी देवता के नहीं, बल्कि एक दैत्य के हाथों ही होगी!" ⛓️ कंस का वध और मुक्ति का मार्ग इसी श्राप के कारण उन छहों ने देवकी के गर्भ से जन्म लिया। चूँकि कंस एक दैत्य का अवतार था, इसलिए हिरण्यकश्यप का श्राप सत्य हुआ और कंस के हाथों उनका वध हुआ। कृष्ण की लीला: कंस वध के बाद जब माता देवकी ने अपने उन 6 पुत्रों को देखने की इच्छा प्रकट की, तब भगवान श्री कृष्ण ने 'सुतल लोक' से उन शिशुओं को लाकर माता से मिलवाया। प्रभु के स्पर्श और कृपा से वे श्रापमुक्त होकर पुनः देवलोक को प्राप्त हुए। 🙏 सीख यह कहानी हमें सिखाती है कि अहंकार देवताओं का भी पतन कर देता है और अंत में केवल प्रभु की भक्ति और कृपा ही जीव का कल्याण करती है। . *🪷राधे.राधे.राधे.राधे.राधे.li 🪷* *🪷राधे.राधे.राधे.राधे.li 🪷* *🪷राधे.राधे.राधे.li 🪷*

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