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(((( जन्मी है राधा रानी बरसाने… बधाई हो )))) . “जन्मी है राधा रानी बरसाने, बधाई हो… वृषभान के घर आनंद भयो, कीर्ति मैया को बधाई हो…” . बरसाने की धरती उस दिन कुछ अधिक ही सुंदर लग रही थी। . आकाश निर्मल था, हवाओं में फूलों की सुगंध थी और पेड़ों पर बैठे पक्षी ऐसे चहक रहे थे, जैसे उन्हें भी किसी बड़े उत्सव का समाचार मिल गया हो। . बरसाने के राजा वृषभान जी के महल में आज असाधारण चहल-पहल थी। . वृषभान जी और उनकी धर्मपत्नी कीर्ति मैया के जीवन में वह शुभ घड़ी आई थी, जिसकी प्रतीक्षा उन्हें लंबे समय से थी। . कीर्ति मैया ने एक दिव्य बालिका को जन्म दिया। . बालिका का मुख ऐसा था, मानो पूर्णिमा का चंद्रमा भी उसके सामने फीका पड़ जाए। . आंखें बंद थीं… मुख पर अद्भुत शांति थी… और चेहरे पर ऐसी दिव्य आभा थी कि जो भी उन्हें देखता, बस देखता ही रह जाता। . कीर्ति मैया ने अपनी पुत्री को हृदय से लगा लिया.. ममता से उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। . वह बार-बार अपनी लाड़ली का मुख देखतीं और कहतीं.. “मेरी बिटिया… तू कौन है? . तेरे आने से मेरा हृदय इतना आनंदित क्यों हो रहा है?” . उधर वृषभान जी की प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं था। . उन्होंने अपनी पुत्री को देखा तो उनकी आंखें भर आईं। . उन्हें लगा जैसे उनके घर में कोई साधारण बालिका नहीं, बल्कि स्वयं प्रेम ने जन्म लिया है। . 🌺 बरसाने में बधाइयां . जैसे ही यह समाचार बरसाने में फैला, चारों ओर आनंद छा गया। . स्त्रियां मंगल गीत गाती हुई वृषभान जी के महल की ओर दौड़ पड़ीं। . कोई सोने की पायल लेकर आई, कोई नन्हे-नन्हे वस्त्र, कोई मिठाई, तो कोई अपनी लाड़ली के लिए झूला। . ढोल-मंजीरे बजने लगे। गलियों में गुलाल उड़ने लगा। . हर घर से एक ही आवाज आने लगी.. “वृषभान के घर लाली आई है!” . बरसाने की गलियां फूलों से सज गईं.. ऐसा लग रहा था मानो स्वयं प्रकृति भी कह रही हो.. “आज बरसाने में प्रेम का जन्म हुआ है।” . 🌸 लेकिन एक बात ने सबको चकित कर दिया.. . राधा रानी के जन्म के बाद एक विचित्र बात सबने देखी.. बालिका ने अपनी आंखें नहीं खोलीं। . कीर्ति मैया उन्हें गोद में लेकर कभी प्यार करतीं, कभी उनके चेहरे को निहारतीं और कभी धीरे से कहतीं... “लाड़ली… एक बार अपनी मैया को तो देख ले।” . लेकिन राधा रानी ने आंखें नहीं खोलीं। दिन बीतते गए। . राधा रानी बड़ी होने लगीं, लेकिन उनकी आंखें बंद ही रहतीं। . कीर्ति मैया के मन में चिंता होने लगी... वह मन ही मन प्रार्थना करतीं.. “हे ठाकुर जी! मेरी बेटी को संसार देखने की दृष्टि देना।” . लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनकी बेटी ने संसार को देखने के लिए आंखें बंद नहीं की थीं… . वह तो उस एक प्रियतम की प्रतीक्षा कर रही थीं, जिसके दर्शन के लिए स्वयं उनकी आंखें बनी थीं। . 🌿 नंदगांव से बरसाने आए कान्हा . एक दिन नंद बाबा अपने लाला कृष्ण को लेकर बरसाने आए। . नन्हे कान्हा की चंचल चाल, घुंघराले बाल और मुख पर मुस्कान देखकर बरसाने की सखियां उन्हें घेरकर खड़ी हो गईं। . कान्हा कभी किसी की माखन की मटकी छेड़ते, कभी किसी की चुनरी खींचते, और कभी मुस्कुराकर सबको अपनी ओर देखने पर मजबूर कर देते। . जब कान्हा राधा रानी के पास पहुंचे तो वातावरण जैसे अचानक शांत हो गया। . नन्हे श्याम ने राधा रानी की ओर देखा। और फिर… जिस क्षण राधा रानी को कान्हा की उपस्थिति का आभास हुआ, उन्होंने धीरे-धीरे अपनी आंखें खोल दीं। . पहली बार... कीर्ति मैया यह देखकर स्तब्ध रह गईं। . जिस बेटी ने इतने दिनों से आंखें नहीं खोली थीं, उसने जैसे ही कान्हा को देखा, उसके मुख पर एक अद्भुत मुस्कान खिल उठी। . कान्हा भी मुस्कुराए... दोनों की आंखें मिलीं। . वह क्षण केवल बरसाने ने नहीं देखा... कहते हैं, वृंदावन की लताएं, यमुना की लहरें और ब्रज की धूल भी उस प्रेम के प्रथम दर्शन की साक्षी बनीं। . कीर्ति मैया की आंखों से आंसू बह निकले.. उन्हें समझ आ गया कि उनकी लाड़ली की आंखें संसार देखने के लिए नहीं खुली थीं। . वह तो अपने श्याम को देखने के लिए प्रतीक्षा कर रही थीं। . ❤️ राधा और कृष्ण.. प्रेम का प्रथम मिलन . कन्हैया ने राधा रानी को देखा और मुस्कुराए। . राधा रानी ने भी अपने श्याम को निहारा... उस क्षण न कोई शब्द था, न कोई परिचय। . फिर भी दोनों एक-दूसरे को ऐसे देख रहे थे जैसे जन्मों से एक-दूसरे को जानते हों। . किसी ने ठीक ही कहा है.. प्रेम को शब्दों की आवश्यकता नहीं होती.. जहां आंखें बोलने लगें, वहां शब्द मौन हो जाते हैं। . बरसाने की सखियां यह दृश्य देखकर खिलखिलाकर हंसने लगीं। . किसी ने कहा..

Comments (2)

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

Sep 19, 2026

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी है नाथ नारायण वासुदेवाय राधे कृष्णा जी का असीम स्नेह अपार आशीर्वाद कृपा सदेव आप और परिवार पर बना रहे 🔥♥️👌👍🙏🙏🙏

SHREE SHARMA

SHREE SHARMA

Sep 19, 2026

जय श्री राधे जी