
SHREE SHARMA
209 days ago
राजा दशरथ ,,,,,,,,,,, जगत के पालनहार भगवन विष्णु नै राजा दशरथ के घर पुत्र रूप में क्यों जन्म लिया ? (एक राजा जो एक अच्छे प्रजा पालक के रूप में प्रजा के हितों का ध्यान रखता है , प्रजा वत्सल होता है, न्याय प्रिय होता है ! ऐसे पुण्य कर्मो के कारण प्रभु को अपने भक्त का घर आने का आमंत्रण स्वीकार करना पड़ता है / घर में आना पड़ता है , " यह भक्त की इच्छा है वह किसी भी रूप में प्रभु को याद करे ! ") राजा दशरथ का जन्म इक्ष्वाकु वंश के तेजस्वी राजा अज के यहाँ रानी इन्दुमती के गर्भ से हुआ था। कौशल प्रदेश, जिसकी स्थापना वैवस्वत मनु ने की थी, पवित्र सरयू नदी के तट पर स्थित था। सुन्दर एवं समृद्ध अयोध्या नगरी इस प्रदेश की राजधानी थी। राजा दशरथ वेदों के मर्मज्ञ, धर्मप्राण, दयालु, रणकुशल, और प्रजा पालक थे। उनके राज्य में प्रजा कष्टरहित, सत्यनिष्ठ एवं ईश्वमर भक्तत थी। उनके राज्य में किसी के भी मन में किसी के प्रति द्वेषभाव का सर्वथा अभाव था। पूर्व कथा प्राचीन काल में मनु और शतरूपा ने वृद्धावस्था आने पर घोर तपस्या की। दोनों एक पैर पर खड़े रहकर 'ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करने लगे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और वर माँगने को कहा। दोनों ने कहा- "प्रभु! आपके दर्शन पाकर हमारा जीवन धन्य हो गया। अब हमें कुछ नहीं चाहिए।" इन शब्दों को कहते-कहते दोनों की आँखों से प्रेमधारा प्रवाहित होने लगी। भगवान बोले- "तुम्हारी भक्ति से मैं बहुत प्रसन्न हूँ वत्स! इस ब्रह्माण्ड में ऐसा कुछ नहीं, जो मैं तुम्हें न दे सकूँ।" भगवान ने कहा- "तुम निस्संकोच होकर अपने मन की बात कहो।" भगवान विष्णु के ऐसा कहने पर मनु ने बड़े संकोच से अपने मन की बात कही- "प्रभु! हम दोनों की इच्छा है कि किसी जन्म में आप हमारे पुत्र रूप में जन्म लें।" 'ऐसा ही होगा वत्स!' भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा- "त्रेता युग में तुम अयोध्या के राजा दशरथ के रूप में जन्म लोगे और तुम्हारी पत्नी शतरूपा तुम्हारी पटरानी कौशल्या होगी। तब मैं दुष्ट रावण का संहार करने माता कौशल्या के गर्भ से जन्म लूँगा।" मनु और शतरूपा ने प्रभु की वन्दना की। भगवान विष्णु उन्हें आशीष देकर अंतर्धान हो गए। प्रेरणा ,,,,,,,,,,राजा दशरथ को राज सत्ता उनके पुण्य कर्मो एवं परोपकार की भावना ( जगत के पालनहार के दर्शन -- भगवान विष्णु जगत का संचालन एवं पालन एक परोपकारी की तरह करते है ! ) के कारण प्राप्त हुई थी ! हमें भी अपने अंदर " परोपकार की भावना को जीवंत करना चाहिए ! ऐसा हम तभी कर पाएंगे जब गाय माता की शरण में जाएंगे ! उसके दूध पीने से ही परोपकार की भावना हमारे मन में जीवंत होती है क्योंकि समस्त देवता उसके दूध में विद्यमान है ! यही कारण है की भगवान् कृष्ण ( विष्णु अवतार ) ने गाये पाली थी एवं उनकी सेवा की थी !

Comments (2)

poonam sharma poonam
Feb 2, 2026
jay shree radhe krishna 🙏🏻🌹
