
SHREE SHARMA
2 days ago
आज पहला दिन - श्री बाल गणपति 💞💞💞💞💞💞💞💞💞💞 १. श्री बाल गणपति पुराण में प्राप्ति: मुद्गल पुराण में ३२ रूपों की सूची में प्रथम नाम - श्री बाल गणेश। श्रीतत्त्वनिधि में इसका ध्यान इस प्रकार दिया है। विवरण: रक्तवर्ण नहीं, बाल-सूर्य जैसे सुनहरे-लाल। बालक जैसे, गले में कोमल फूलों की माला। चार भुजा - हाथ में केला, आम, कटहल, गन्ना और अपना प्रिय मोदक, सूंड से मोदक को ग्रहण करते हुए। यह पृथ्वी की समृद्धि का प्रतीक है। ३२ रूपों में से हर एक रूप का पुराण में ध्यान केवल एक श्लोक में दिया गया है, क्योंकि श्रीतत्त्वनिधि और मुद्गल पुराण में उसी एक श्लोक से उस रूप का पूरा स्वरूप - वर्ण, आयुध, वाहन - बताया जाता है। बाल गणपति का असली स्तोत्र उस ध्यान के साथ **श्री गणपति स्तोत्रम्** - जो १९ श्लोक का है - को जोड़कर पढ़ा जाता है। वही स्तोत्र पुराणों में बाल रूप के लिए विशेष रूप से कहा गया है। तो बाल गणपति की पूरी पूजा इस प्रकार है - बीज-ध्यान - ३२ रूपों का प्राण करस्थ-कदली-चूत-पनसेक्षु-चमोदकं। बालसूर्यनिभं वन्दे देवं बालगणाधिपम्॥ अब इसका विस्तृत स्तोत्र - पुराणोक्त श्री गणपति स्तोत्रम् जेतुं यस्त्रिपुरं हरेण हरिणा व्याजाद्बलिं बध्नता स्रष्टुं वारिभवोद्भवेन भुवनं शेषेण धर्तुं धरम्। पार्वत्या महिषासुरप्रमथने सिद्धाधिपैः सिद्धये ध्यातः पञ्चशरेण विश्वजितये पायात् स नागाननः॥ १॥ विघ्नध्वान्तनिवारणैकतरणिर्विघ्नाटवीहव्यवाट् विघ्नव्यालकुलाभिमानगरुडो विघ्नेभपञ्चाननः। विघ्नोत्तुङ्गगिरिप्रभेदनपविर्विघ्नाम्बुधेर्वाडवो विघ्नाघौधघनप्रचण्डपवनो विघ्नेश्वरः पातु नः॥ २॥ खर्वं स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगण्डस्थलम्। दन्ताघातविदारितारिरुधिरैः सिन्दूरशोभाकरं वन्दे शैलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम्॥ ३॥ और आगे ४ से १९ श्लोक तक - गजाननाय महसे, श्वेताङ्गं श्वेतवस्त्रं, गणेश हेरम्ब गजाननेति, अनन्तचिद्रूपमयं गणेशं, विश्वादिभूतं हृदि योगिनां, यदीयवीर्येण समर्थभूता, सर्वान्तरे संस्थितमेकमूढं, यं योगिनो योगबलेन, देवेन्द्रमौलिमन्दार, एकदन्तं महाकायं, यदक्षर पद भ्रष्टं - यह पूरा १९ श्लोक का स्तोत्र है जो बाल गणपति के साथ ही पढ़ा जाता है। **इसका अर्थ:** बाल रूप में बप्पा को केला, आम, कटहल, गन्ना प्रिय है - ये पृथ्वी की समृद्धि हैं। जो साधक रोज इस ध्यान + इस १९ श्लोक के स्तोत्र को पढ़ता है, उसे संतान-सुख, नए कार्य में बाल-सूर्य जैसी वृद्धि मिलती है। इसी प्रकार हर रूप के लिए - ध्यान-स्तोत्र - पुराणोक्त: करस्थ-कदली-चूत-पनसेक्षु-चमोदकं। बालसूर्यनिभं वन्दे देवं बालगणाधिपम्॥ १॥ रक्तवर्णः पदच्छेद: कर-स्थ कदली चूत पनस इक्षु च मोदकं, बाल-सूर्य-निभं वन्दे देवं बाल-गणाधिपम्। मूल मंत्र: ॐ बाल गणपतये नमः। - १०८ बार प्रार्थना-स्तोत्र: बालं गणेशं भजतां मनोहरं, फल-प्रियं पुष्प-लता-विभूषितम्। भक्तानुकम्पी सकलार्थ-दायकं, नमामि बालं गजवक्त्र-नायकम्॥ महात्म्य / भूमिका: बाल गणपति संतान-प्राप्ति, नए घर में प्रवेश, बच्चे के अन्नप्राशन से पहले पूज्य हैं। जो भक्त बाल-रूप में बप्पा को पूजता है, उसका कार्य बाल-सूर्य की तरह धीरे-धीरे बढ़कर पूर्ण तेज पाता है। आज की पूजा-विधि: १. चौकी पर पीला कपड़ा, बप्पा को केला और आम का भोग २. ध्यान श्लोक ३ बार पढ़कर - "मम पुत्रवत् कार्यस्य सिद्ध्यर्थं बाल-गणपति पूजनं करिष्ये" ३. १०८ बार मूल मंत्र, अंत में एक मोदक बच्चे को प्रसाद में दें *ध्यान-श्लोक बदल जाता है* - तरुण के लिए *पाशांकुशापूपकपित्थजम्बू...* वाला, भक्ति के लिए *नारिकेलाम्रकदली...* वाला, पर स्तोत्र का ढांचा यही रहता है।

Comments (1)

Rama Devi Sahu
Sep 12, 2026
ॐ गं गणपतए नमः 🙏🌹 भगवान गणेश जी की कृपा आप सपरिवार पर सदा बनी रहे 🙏🌹 शुभ रात्रि वंदन जी 🌹🌹
