
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
211 days ago
*भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु को क्यों दिया था शाप ?* *ये कथा उस समय की है जब असुरराज हिरण्यकशिपु के मारे जाने के बाद असुरों के राजा प्रहलाद बने. हालांकि प्रहलाद विष्णु के भक्त थे मगर फिर भी असुर समुदाय के उत्थान के लिए उन्हें भी देवताओं से कई बार युद्ध लड़ने पड़ते थे. लेकिन फिर प्रहलाद ने जब एक समय के बाद सब कुछ त्याग दिया तो उसका पुत्र विरोचन राजा बना. विरोचन के बाद असुरों के राजा बलि हुए. बलि के राजा बनने के बाद असुरों के साथ उसका भयंकर युद्ध होता रहा. मगर फिर बाद में जब विष्णु भी देवताओं के युद्ध में भाग लेने लगे तो असुर हारने लगे और उनमे भगदड मच गयी. जब बहुत सारे असुर मारे जाने लगे तो असुरों ने जाकर भृगु नंदन शुक्राचार्य की शरण ली.* *शुक्रचार्य ने असुरों को जीत का विश्वास दिलाया और खुद महादेव से मंत्र का वरदान मांगने के लिए घोर तप करने लगे. शुक्रचार्य के उस घोर तप का नाम कणधूम था जो उन्हें एक वृक्ष से उल्टा लटक कर केवल धुंवे का पान करना था वो भी एक हज़ार वर्ष तक. इस बीच असुरों ने भृगु पत्नी यानी की शुक्राचार्य की माँ के यहाँ जाकर शरण ले लिया. मगर विष्णु एक-एक असुरों का संहार करने के लिए असुरों को ढूंढते रहे. जब विष्णु को पता चला कि सारे दैत्य भृगु पत्नी के यहाँ शरण लिए हुए हैं तो विष्णु उन दैत्यों को मारने चले गए. मगर भृगु पत्नी ने दैत्यों के प्राण रक्षा का वचन दिया था क्यूंकि वो उनकी शरण में थे. धर्म और अधर्म के बीच रुकावट बनने के कारण ही विष्णु को भृगु पत्नी पर अपना सुदर्शन चक्र चलाना पड़ा. लेकिन जब भृगु को पता चला की विष्णु ने उनकी पत्नी का सिर काट दिया है तो भृगु ने भी गुस्से में आकर विष्णु को मानव योनी में जन्म लेने का शाप दे दिया....इसी कारण विष्णु मानव योनी में जन्म लिए..*

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
