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हनुमान जी, जिन्हें हम प्यार से बजरंगबली कहते हैं, उनके जन्म की कथा अत्यंत पावन और प्रेरणादायक है। यह न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि इसमें दैवीय नियोजन और समर्पण का भी गहरा संगम मिलता है। यहाँ मारुति के महाबली बनने की अद्भुत यात्रा का विवरण है: ## 1. पूर्व जन्म का प्रसंग माता अंजना पूर्व जन्म में **पुंजिकस्थला** नाम की एक अप्सरा थीं। एक ऋषि के श्राप के कारण उन्हें वानर रूप में पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। इस श्राप से मुक्ति का एकमात्र मार्ग यही था कि वे शिव के अवतार को पुत्र रूप में जन्म दें। उन्होंने केसरी से विवाह किया और मतंग ऋषि के मार्गदर्शन में घोर तपस्या की। ## 2. तीन शक्तियों का मिलन हनुमान जी के जन्म में तीन प्रमुख शक्तियों का योगदान माना जाता है: * **भगवान शिव:** अंजना की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने अपने ग्यारहवें रुद्र अवतार के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। * **अग्नि देव और राजा दशरथ की खीर:** कहा जाता है कि जब राजा दशरथ पुत्र कामेष्टि यज्ञ कर रहे थे, तब अग्नि देव ने उन्हें दिव्य खीर दी थी। उसी समय एक चील उस खीर का एक भाग लेकर उड़ गई और उसे उसी स्थान पर गिरा दिया जहाँ माता अंजना तपस्या कर रही थीं। * **वायु देव:** पवन देव ने उस दिव्य खीर (प्रसाद) को माता अंजना की अंजलि तक पहुँचाया। इसे ग्रहण करने के पश्चात हनुमान जी का जन्म हुआ, इसीलिए उन्हें 'पवनपुत्र' भी कहा जाता है। ## 3. मारुति से 'हनुमान' बनने की घटना बचपन में हनुमान जी का नाम **मारुति** था। एक सुबह उन्हें बहुत भूख लगी थी और उन्होंने उगते हुए लाल सूर्य को एक मीठा फल समझ लिया। * वे सूर्य को निगलने के लिए आकाश में उड़ चले। उसी दिन राहु भी सूर्य को ग्रास बनाने आया था, जिसे मारुति ने भगा दिया। * यह देख देवराज इंद्र ने उन पर **'वज्र'** से प्रहार किया, जिससे उनकी ठुड्डी (हनु) टूट गई और वे मूर्छित होकर गिर पड़े। * क्रोधित होकर पवन देव ने संसार की वायु रोक दी। तब ब्रह्मा जी और अन्य देवताओं ने मारुति को पुनः जीवित किया और उन्हें अतुलनीय शक्तियाँ प्रदान कीं। 'हनु' टूटने के कारण ही उनका नाम **'हनुमान'** पड़ा। > **एक विचारणीय सूत्र:** > हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि शक्ति के साथ विनम्रता और भक्ति का होना आवश्यक है। उन्होंने अपनी अपार शक्तियों का उपयोग सदैव धर्म की रक्षा और प्रभु श्री राम की सेवा में किया। > जय श्री राम! जय बजरंगबली! 🙏🏼

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