
SHREE SHARMA
220 days ago
(((( सब जीवों में भगवान ही हैं)))) . एक मांडव्य ऋषि नाम के महात्मा थे। वो दाहिने पैर के अंगूठे के बल पर पूरा शरीर का भार रखकर और हाथ ऊपर उठाकर मंत्र जाप कर रहे थे। . उस राज्य में कुछ चोरों ने राजा के यहाँ चोरी की। राज सैनिकों ने उनका पीछा किया। वो चोर ऋषि के आश्रम में जाकर छुप गए। . उन्होंने सोचा कि अगर हम महात्मा के आश्रम में जाएँगे तो राज सैनिक यह सोच कर वापस चले जाएंगे कि यहाँ कैसे चोर छुपे हो सकते हैं। पर आश्रम में घुसते समय राज सैनिकों की दृष्टि उन पर पड़ गई। . वह सब चोरी किए हुए सामान सहित पकड़े गए। कर्मचारियों ने सोचा कि महात्मा भी इनके साथी हैं। यह अपने आश्रम में चोर रखते हैं और चोरी करवाते हैं। राज सैनिक मांडव्य ऋषि को भी अपने साथ ले गये और उनको राजा के सामने पेश किया। . राजा ने उन्हें सूली की सजा दे दी। सूली की सजा बड़ी भयानक होती थी। उसमें अपराधी को सीढ़ियों से ऊपर ले जाकर एक भाले जैसे यंत्र पर छोड़ा जाता था। गुदा से भाला घुस जाता था और अपराधी मृत्यु तक उसी में टंगा रहता था। . इससे तड़प-तड़प कर बड़ी भयानक मृत्यु होती थी। जल्लाद महात्मा को भी ऐसे कर चले गए। वो तो योगी थे. सूली पर ही पद्मासन लगा के बैठ गए। . अगले दिन जब जल्लाद उनके शव को उतारने गए तो ऋषि पद्मासन में बैठे थे। वह भाग कर गए और राजा को सूचना दी। . राजा ने सोचा यह तो बड़ा अपराध बन गया, यह तो कोई ऋषि हैं जिनको हमने ग़लत सजा दे दी। . राजा गाय और ब्राह्मण को आगे कर के और हाथ जोड़कर ऋषि के सामने गए। राजा ने कहा महाराज मुझे बिल्कुल पता नहीं था कि आप यहाँ कैसे लाए गए, मुझे क्षमा कर दीजिए। . ऋषि बोले मुझे आपसे कोई मतलब नहीं है, पहले यह सूली निकलवाएं। लाख कोशिश के बावजूद सूली नहीं निकली। ऋषि के कहने पर उन्होंने सूली काट दी। . ऋषि वहाँ से अंतर्ध्यान हो कर सीधे यमराज के पास पहुँचे। धर्मराज से कहा कि मैंने क्या ऐसा पाप किया जो आपने मुझे ऐसा दंड दिया? ऋषि बड़े गुस्से में थे। . धर्मराज ने उन्हें बताया कि जब वे आठ वर्ष के थे तो उन्होंने खेल-खेल में एक तितली को पकड़ा और उसकी गुदा में बंबूल का कांटा डाल कर छोड़ दिया। . क्योंकि बंबूल का कांटा बड़ा होता है, तो तितली तड़प-तड़प के काफी समय में मृत्यु को प्राप्त हुई। महात्मा होने पर भी उस दुष्कर्म के परिणाम स्वरूप उनकी गुदा में सूली डाली गई। इन ऋषि का नाम बाद में अणिमाण्डव्य हुआ। . एक महात्मा को भी इतना बड़ा दंड दिया गया तो हम और आप कैसे कर्म विधान से बच सकते हैं। . अगर आप कॉकरोच या किसी और जीव को जानबूझकर मार रहे हैं, तो आपको हिसाब देना पड़ेगा। ऐसे कर्म ना करें जिनसे पाप हों। . नाम जप करें। पवित्रता और स्वच्छता रखें। पहले से ही केमिकल या कोई ऐसी औषधि रख लें जिससे कीड़े मकोड़ों की उत्पत्ति ही न हो। . अगर आप उन्हें देख कर उनके ऊपर कीटनाशक डालेंगे तो यह हत्या के बराबर है और आपको इसका दंड मिलेगा। ~~~~~~~~~~~~~~~~~ ((((((( जय जय श्री राधे ))))))) ~~~~~~~~~~~~~~~~~

Comments (4)

Rama Devi Sahu
Jan 22, 2026
🙏‼️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna ‼️🙏

SHREE SHARMA
Jan 22, 2026
धन्यवाद जी 🙏

hansu parjapti
Jan 22, 2026
nice story 👏🌹 jeisi karni vaisi bharni 😞😞
