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जय भोलेनाथ जी 🙏 शुभ दोपहर जी मनुष्य सारा जीवन दूसरों को खुश करने में लगा देता है, फिर भी लोग खुश नहीं होते... *इसका कारण क्या है?* भोलेनाथ खुद इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। शिव जी ने क्या नहीं दिया? - देवताओं को अमृत दे दिया, खुद विष पी लिया — *नीलकंठ* बन गए। - भक्तों को मनचाहा वरदान दे दिया — रावण को सोने की लंका, भस्मासुर को वरदान, फिर भी लोग दोष ही निकालते रहे। - श्मशान में रहते हैं, भस्म लगाते हैं — क्योंकि उन्हें किसी को दिखावे से खुश नहीं करना। शिव जी हमें यही सिखाते हैं — *सबको खुश करना असंभव है।* 1. *लोग कभी खुश नहीं होंगे, क्योंकि उनकी खुशी का घड़ा भरता ही नहीं।* आप आज उनकी 10 बात मानोगे, कल वो 11वीं के लिए नाराज हो जाएंगे। आप अपना सब कुछ लुटा दोगे, फिर भी कहेंगे — "और क्या ही किया है मेरे लिए?" 2. *आप दूसरों को खुश करते-करते खुद को दुखी कर लेते हो।* मन में सोचते हो — "मैंने इतना किया, फिर भी..." यही "फिर भी" आपको अंदर से खा जाता है। रात को नींद नहीं आती। 3. *जो सबसे ज्यादा सबको खुश करने की कोशिश करता है, अंत में वही सबसे ज्यादा अकेला रह जाता है।* क्योंकि लोग उसकी आदत बना लेते हैं, कदर नहीं करते। तो फिर क्या करें? भोलेनाथ का मार्ग क्या है? *पहला — सबको नहीं, सत्य को खुश करो।* दुनिया को खुश करने से अच्छा है, अपने महादेव को, अपने धर्म को, अपनी आत्मा को खुश करो। जो सही है वो करो, जो सच है वो बोलो। जो समझेगा वो साथ रहेगा, जो नहीं समझेगा वो वैसे भी नहीं रहने वाला। *दूसरा — 'ना' कहना सीखो।* भोलेनाथ भी हर किसी को हर वरदान नहीं देते। कभी-कभी ना बोलना भी धर्म है। अगर आप थक गए हो, दुखी हो, तो ना बोल दो। इससे आप स्वार्थी नहीं, सच्चे बनते हो। *तीसरा — कर्म करो, फल की चिंता मत करो।* गीता में कृष्ण जी ने भी यही कहा। लोगों की खुशी फल है, वो आपके हाथ में नहीं है। आपके हाथ में सिर्फ आपका कर्म है, आपकी नियत है। नियत साफ रखो, कर्म अच्छा करो, बाकी महादेव पर छोड़ दो। > लोग क्या कहेंगे, ये सोचना भी छोड़ दो। > जो तुम्हारे हैं, वो कभी तुमसे दुखी नहीं होंगे। > और जो दुखी होते हैं, वो कभी तुम्हारे थे ही नहीं। आज दोपहर भोलेनाथ से यही प्रार्थना है — आपको इस भागदौड़ से शांति मिले। आप दूसरों के लिए जीते-जीते खुद को मत भूल जाना। कभी-कभी खुद के लिए भी जी लेना, खुद को भी खुश कर लेना — यही भोलेनाथ की सच्ची पूजा है। *हर हर महादेव 🙏*

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