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18.6.2026 भोजन अच्छे कपड़े फैशन मकान मोबाइल फोन कंप्यूटर कार धन संपत्ति सम्मान आदि भौतिक वस्तुओं से सुख मिलता है, इसमें कोई संदेह नहीं है। *"परंतु इन पदार्थों से जो सुख मिलता है, वह क्षणिक होता है, और उसकी क्वालिटी भी सामान्य होती है। ऐसे क्षणिक सामान्य सुख से आत्मा की तृप्ति नहीं होती।"* यदि कोई व्यक्ति इन भौतिक साधनों का सुख भोगता है, और साथ में झूठ छल कपट रिश्वतखोरी ब्लैक मार्केटिंग स्मगलिंग आदि बुरे काम भी करता है, *"तब इन बुरे कर्मों के करने से तत्काल ईश्वर का दंड मिलता है, जैसे चिंता तनाव भय शंका लज्जा आत्मग्लानि इत्यादि, इस दंड से भौतिक वस्तुओं से प्राप्त होने वाला सुख भी आधा तो दब ही जाता है। इसलिए तब भौतिक वस्तुओं के क्षणिक व सामान्य सुख का कोई विशेष मूल्य नहीं रहता।"* *"यदि कोई व्यक्ति सामान्य भौतिक साधन प्राप्त कर ले, जिससे उसका खाना पीना जीना ठीक-ठाक चल जाए। और वह सेवा नम्रता सभ्यता परोपकार दान दया सत्यग्राहिता सत्यवादिता आदि उत्तम गुण कर्मों को भी धारण कर ले, जिसका मन शुद्ध हो, तथा जिसके विचार वेदों के अनुकूल हों, सत्य हों, वही व्यक्ति संसार में सबसे अधिक सुखी होता है।" "ऐसे सुख से आत्मा की तृप्ति हो जाती है।"* *"यदि आपके अंदर भी ये सारे गुण कर्म हों, तो बहुत अच्छी बात है। यदि न हों, तो आप भी इन गुण कर्मों को धारण करने का प्रयत्न करें, जिससे आप भी सुख पूर्वक जीवन जी सकें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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