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हिंदू धर्म में **अधिक मास** (जिसे मलमल मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) को आध्यात्मिक रूप से बहुत पवित्र और फलदायी माना गया है। इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। इस दौरान क्या करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए, इसकी एक संक्षिप्त और स्पष्ट सूची नीचे दी गई है: ## क्या करें (विहित कर्म) अधिक मास मुख्य रूप से भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) की आराधना के लिए समर्पित है। इस दौरान निम्नलिखित कार्य करने चाहिए: * **भगवान विष्णु की पूजा और मंत्र जाप:** प्रतिदिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या महामंत्र का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी होता है। * **दान-पुण्य:** इस महीने में दान का विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, पानी, पीले फल या सामर्थ्य के अनुसार धन का दान करें। इस मास में **मालपुए का दान** करने की विशेष परंपरा है। * **धार्मिक ग्रंथों का पाठ:** श्रीमद्भागवत पुराण, भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम या रामायण का पाठ करना या सुनना बहुत शुभ माना जाता है। * **व्रत और उपवास:** यदि संभव हो तो एक समय भोजन करें, फलाहार रहें या अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत रखें। * **दीपदान:** शाम के समय तुलसी के पौधे, घर के मुख्य द्वार और मंदिर में घी का दीपक अवश्य जलाएं। * **पवित्र नदियों में स्नान:** यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। ## क्या न करें (वर्जित कर्म) चूंकि अधिक मास को सूर्य संक्रांति से रहित माना जाता है (इस महीने में सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं करता), इसलिए इसमें सांसारिक और मांगलिक कार्यों की मनाही होती है। * **मांगलिक कार्य:** इस पूरे महीने में विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत (जनेऊ), गृह प्रवेश, भूमि पूजन और तिलक जैसे शुभ व मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं। * **नई शुरुआत या खरीदारी:** नया व्यवसाय शुरू करना, नया मकान या वाहन खरीदना, या बड़े निवेश करने से बचना चाहिए। * **तामसिक भोजन का त्याग:** इस महीने में मांस, मछली, अंडा, लहसुन, प्याज और नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। सात्विक भोजन ही अपनाएं। * **विवाद और झूठ से बचें:** किसी का अपमान न करें, झूठ न बोलें, क्रोध और गृह-क्लेश से दूर रहें। मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें। * **कपिल गाय का दूध या विशिष्ट सब्जियां:** शास्त्रों के अनुसार, इस मास में कुछ विशेष चीजों जैसे मूली, प्याज, लहसुन, राई, गोभी और नशीली वस्तुओं का त्याग करने की सलाह दी जाती है। > **संक्षेप में समझें:** अधिक मास भौतिक सुख-सुविधाओं को बढ़ाने का नहीं, बल्कि अपने **मानसिक और आध्यात्मिक स्तर को ऊंचा उठाने का समय** है। इसलिए इस समय को भगवान की भक्ति और परोपकार में लगाना ही सबसे उत्तम है। >

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