
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
138 days ago
卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐 🌞 दिनांक - 15 अप्रैल 2026 ⛅दिन - बुधवार ⛅विक्रम संवत् - 2083 ⛅अयन - उत्तरायण ⛅ऋतु - वसंत ⛅मास - वैशाख ⛅पक्ष - कृष्ण ⛅तिथि - त्रयोदशी रात्रि 10:31 तक तत्पश्चात् चतुर्दशी ⛅नक्षत्र - पूर्व भाद्रपद दोपहर 03:22 तक तत्पश्चात् उत्तर भाद्रपद ⛅योग - ब्रह्म दोपहर 01:25 तक तत्पश्चात् इन्द्र ⛅राहुकाल - दोपहर 12:27 से दोपहर 02:02 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅सूर्योदय - 06:06 ⛅सूर्यास्त - 06:48 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में ⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:36 से प्रातः 05:21 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) ⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं ⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:04 से मध्यरात्रि 12:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार) 🌥️व्रत पर्व विवरण - मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत 🌥️विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34) 🌱गर्मियों में विशेष उपयोगी-पुदीना🌱 🔹पुदीना गर्मियों में विशेष उपयोगी एक सुगंधित औषध है यह रुचिकर, पचने में हलका, तीक्ष्ण, ह्रदय-उत्तेजक, विकृत कफ को बाहर लानेवाला, गर्भाशय-संकोचक , चित्त को प्रसन्न करनेवाला हैं । 🔹पुदीने के सेवन से भूख खुलकर लगती है और वायु का शमन होता हैं । यह पेट के विकारों में विशेष लाभकारी है । श्वास, मुत्राल्पता तथा त्वचा के रोगों में भी यह उपयुक्त है । 🔹औषधि प्रयोग🔹 १] पेट के रोग : अपच, अजीर्ण, अरुचि, मंदाग्नि, अफरा, पेचिश, पेट में मरोड़, अतिसार, उलटियाँ, खट्टी डकारें आदि में पुदीने के रस में जीरे का चूर्ण व आधे नींबू का रस मिलाकर पीने से लाभ होता है । २] मासिक धर्म : पुदीने को उबालकर पीने से मासिक धर्म की पीड़ा तथा अल्प मासिक स्राव में लाभ होता है । अधिक मासिक स्त्राव में यह प्रयोग न करें । ३] गर्मियों में : गर्मी के कारण व्याकुलता बढ़ने पर एक गिलास ठंडे पानी में पुदीने का रस तथा मिश्री मिलाकर पीने से शीतलता आती है । ४] पाचक चटनी : ताजा पुदीना, काली मिर्च, अदरक, सेंधा नमक, काली द्राक्ष और जीरा – इन सबकी चटनी बनाकर उसमें नींबू का रस निचोड़ कर खाने ने रूचि उत्पन्न होती है, वायु दूर होकर पाचनशक्ति तेज होती है । पेट के अन्य रोगों में भी लाभकारी है । ५] उलटी-दस्त, हैजा : पुदीने के रस में नींबू का रस, अदरक का रस एवं शहद मिलाकर पिलाने से लाभ होता है । ६] सिरदर्द : पुदीना पीसकर ललाट पर लेप करें तथा पुदीने का शरबत पिएं । ७] ज्वर आदि : गर्मी में जुकाम, खाँसी व ज्वर होने पर पुदीना उबाल के पीने से लाभ होता है । ८] नकसीर : नाक में पुदीने के रस की ३ बूँद डालने से रक्तस्त्राव बंद हो जाता है । ९] मूत्र-अवरोध : पुदीने के पत्ते और मिश्री पीसकर १ गिलास ठंडे पानी में मिलाकर पिएं । १०] गर्मी की फुंसियाँ : समान मात्रा में सूखा पुदीना एंव मिश्री पीसकर रख लें । रोज प्रात: आधा गिलास पानी में ४ चम्मच मिलाकर पिएं । ११] हिचकी : पुदीने या नींबू के रस-सेवन से राहत मिलती है । 🔹विशेषः पुदीने का ताजा रस लेने की मात्रा है 5 से 20 ग्राम । पत्तों का चूर्ण लेने की मात्रा 3 से 6 ग्राम । काढ़ा लेने की मात्रा 20 से 40 ग्राम । अर्क लेने की मात्रा 20 से 40 ग्राम । बीज का तेल लेने की मात्रा आधी बूँद से 3 बूँद । ▬▬๑⁂❋⁂๑▬▬ 🚩जय श्री राम🚩 🚩धर्मो रक्षति रक्षितः 🇮🇳हिन्दू राष्ट्र भारत

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