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SHREE SHARMA

448 days ago

गोपियां भगवान के स्वरूप में लीन होने के पहले एक ही श्लोक में उनकी स्तुति की,- आहुश्च ते नलिननाभ पदारविन्दं योगेश्वरैर्हृदि विचिन्त्यमगाधबोधै:। संसारकूपपतितोत्त्वरणावलम्बं गेहं जुषामपि मनस्युदियात्सदा न:।। हे कमलनाभ ! प्रकाण्ड ज्ञानी तथा सिद्ध योगियों द्वारा ध्यान करने योग्य और संसारकूपमें पड़े हुए प्राणियोंके उद्धार का एकमात्र अवलम्बन स्वरूप आपका चरणकमल घर-वारका सेवन करती हुई भी हम गोपियोंके मनमें निरन्तर बना रहे। जय श्री राधे कृष्ण

Comments (1)

Pannalal Chouhan

Pannalal Chouhan

Jun 8, 2025

जय श्री राधे कृष्णा जी राधे राधे