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हनुमान चालीसा की रचना के पीछे की कहानी बेहद रोमांचक और अटूट विश्वास की प्रतीक है। जनश्रुतियों और ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, इसकी रचना 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा की गई थी। इसकी रचना के पीछे की मुख्य घटना इस प्रकार है: 1. मुगल सम्राट अकबर का बुलावा कहा जाता है कि तुलसीदास जी की प्रसिद्धि उस समय चरम पर थी और उनके द्वारा किए गए कथित 'चमत्कारों' की चर्चा मुगल सम्राट अकबर तक पहुँची। अकबर ने उन्हें अपने दरबार में बुलाया और उनसे कोई चमत्कार दिखाने को कहा। 2. तुलसीदास जी का कारावास तुलसीदास जी ने विनम्रता से उत्तर दिया कि, "मैं कोई जादूगर नहीं हूँ, मैं केवल श्री राम का भक्त हूँ। असली चमत्कार तो केवल भगवान ही कर सकते हैं।" उनकी इस बात से अकबर असंतुष्ट हो गया और उसने उन्हें फतेहपुर सीकरी के पास कारावास (जेल) में डाल दिया। 3. चालीसा की उत्पत्ति जेल की कोठरी में बंदी रहते हुए तुलसीदास जी ने विचलित होने के बजाय हनुमान जी की शरण ली। उन्होंने हनुमान जी की स्तुति में 40 चौपाइयों की रचना की, जिसे आज हम 'हनुमान चालीसा' के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि उन्होंने लगातार 40 दिनों तक इसका पाठ किया। 4. बंदरों का आतंक जैसे ही तुलसीदास जी ने चालीसा पूर्ण की, अचानक हजारों की संख्या में बंदरों ने अकबर के महल और पूरी फतेहपुर सीकरी पर हमला कर दिया। बंदरों ने भारी उत्पात मचाया और सैनिकों के लिए उन्हें रोकना असंभव हो गया। > परिणाम: अकबर को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे सलाह दी गई कि यह तुलसीदास जी के अपमान का फल है। अकबर ने तुरंत तुलसीदास जी को रिहा कर दिया और उनसे क्षमा मांगी। जैसे ही वे मुक्त हुए, बंदरों का हमला भी शांत हो गया। > हनुमान चालीसा का महत्व तुलसीदास जी ने चालीसा की अंतिम पंक्तियों में स्वयं लिखा है: * "जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा।" * अर्थात् जो इसका पाठ करेगा, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी।

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