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जय श्री गणेश! शुभरात्रि। आज की रात्रि के लिए एक छोटा सा विचार, जो हमारे जीवन की शांति और सार्थकता को गहराई दे सकता है: ## 🌙 **आज का रात्रि चिंतन** **"शब्द और व्यवहार"** जीवन में सब कुछ दोबारा मिल सकता है, लेकिन **बीता हुआ समय** और **मुख से निकले शब्द** कभी वापस नहीं आते। * **मौन की शक्ति:** कभी-कभी चुप रहना हारना नहीं, बल्कि सामने वाले के प्रति अपने बड़प्पन और संस्कारों का परिचय देना है। * **कर्म का विधान:** जैसे दीपक स्वयं नहीं बोलता, उसका प्रकाश उसका परिचय देता है; वैसे ही आप अपने बारे में कुछ न कहें, बस अच्छे कर्म करते रहें, वही आपका परिचय देंगे। * **संतोष:** दिन भर की भागदौड़ के बाद, रात का यह समय आत्म-निरीक्षण का है। जो प्राप्त है, वही पर्याप्त है—इसी भाव के साथ चैन की नींद सोएं। > "परमात्मा कभी भाग्य नहीं लिखते, जीवन के हर कदम पर हमारी सोच, हमारा व्यवहार और हमारे कर्म ही हमारा भाग्य लिखते हैं।" > आपका आने वाला कल मंगलमय हो और श्री गणेश जी की कृपा आप पर बनी रहे। **शुभरात्रि!**

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