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SHREE SHARMA

410 days ago

॥ श्रीरामद्वादशनामस्तोत्रम् ॥ (बेहद प्रभावशाली ) केवल 12 नामों का जाप आपकी पूरी किस्मत बदल सकता है! यह कोई साधारण नाम नहीं हैं ये हैं श्रीराम के द्वादश नाम। यह इतना प्रभावशाली स्तोत्र इसलिए है क्योंकि इन १२ चमत्कारी नामों का वर्णन दो पुराणों में मिलता है। भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद के रूप में स्कन्द पुराण में और दूसरा ब्रह्माजी एवं नारद जी के संवाद के रूप में ब्रह्माण्ड 86 पुराण में। इस में हमने दोनों ही स्तोत्र संलग्न कर पाठ किये है इसीलिए यह स्तोत्र जो अभी आप सुनेंगे वह प्रचंड ऊर्जा से भरा है। इस स्तोत्र की फलश्रुति के बारे में वर्णन है---- १) जो व्यक्ति द्वादशी तिथि को इस स्तोत्र का पाठ राम जी में मन लगाकर करता है उसके कुष्ठ रोग और गंभीर गरीबी जैसे दुख नष्ट हो जाते हैं २) अगर कोई व्यक्ति सप्ताह में सात बार नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसके जीवन से सारी नकारात्मक ऊर्जा, बुरे प्रभाव और दुर्भाग्य का नाश होना शुरू हो जाता है। उसका जीवन एक नई दिशा में बढ़ता है, जहां सिर्फ प्रकाश, सफलता और शांति होती है। ३) ग्रहण के समय, यदि आप नदी के जल में खड़े होकर इन नामों का पाठ करें, तो आपको अश्वमेध यज्ञ के सौ यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इतना ही नहीं, इस स्तोत्र का जाप करने वाला व्यक्ति अंत में ब्रह्मलोक को प्राप्त करता है जहां केवल वही आत्माएं पहुंचती हैं जो पूर्ण पुण्य और भक्ति से भरे होते हैं। ४) जो मनुष्य सुबह, दोपहर और शाम त्रिसंध्या में इन बारह नामों का स्मरण करता है, वह जीवन की सबसे बड़ी समस्या दारिद्र्य से मुक्त हो जाता है। उसका जीवन धन, अन्न, और समृद्धि से परिपूर्ण हो जाता है। ५) यह स्तोत्र न केवल ग्रह दोषों का नाश करता है, बल्कि आपके हर अधूरे कार्य को सिद्ध करता है। यह शरीर को दिव्य बनाता है, आयु बढ़ाता है, और जंगल या देव संग्राम जैसी भयावह स्थितियों में भी आपकी रक्षा करता है। ६) जो व्यक्ति अर्ध रात्रि को इसका जाप करता है, उसका जीवन हर बुराई से मुक्त होकर सुख, शांति और आनंदमय बन जाता है। और अंत में वह व्यक्ति स्वयं विष्णु के परम धाम को प्राप्त करता है जहां न मृत्यु है, न मोह, सिर्फ शाश्वत आनंद । जय श्री राम ॥ श्रीरामद्वादशनामस्तोत्रम् ॥ विनियोगः अस्य श्रीरामद्वादशनामस्तोत्रमहामन्त्रस्य निटिलाक्षो भगवान् ऋषिः अनुष्टुप्छन्दः श्रीरामचन्द्रो देवता श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः प्रथमं श्रीधरं विद्याद्दवितीयं रघुनायकम् । तृतीयं रामचन्द्रं च चतुर्थं रावणान्तकम् ॥ १॥ पञ्चमं लोकपूज्यं च षष्ठमं जानकीपतिम् । सप्तमं वासुदेवं च श्रीरामं चाष्टमं तथा ॥ २॥ नवमं जल्दश्यामं दशमं लक्ष्मणाग्रजम् । एकादशं च गोविन्दं द्वादशं सेतुबन्धनम् ॥ ३॥ द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छ्रद्धयान्वितः । अर्धरात्रे तु द्वादश्यां कुष्ठदारिद्र्यनाशनम् ॥ ४॥ अरण्ये चैव सङ्गामे अग्नौ भयनिवारणम् । ब्रह्महत्या सुरापानं गोहत्याऽऽदि निवारणम् ॥ ५॥" सप्तवारं पठेन्नित्यं सर्वारिष्टनिवारणम् । ग्रहणे च जले स्थित्वा नदीतीरे विशेषतः! अश्वमेधशतं पुण्यं ब्रह्मलोकं गमिष्यति ॥ ६॥ इति श्री स्कान्दपुराणे उत्तरखण्डे श्रीउमामहेश्वरसंवादे श्रीरामद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् । ॥ श्रीरामद्वादशनामस्तोत्रम् ॥ ॐ प्रथम श्रीकरं नित्यं द्वितीयं दशरथात्मजम् । तृतीयं रामचन्द्रं च चतुर्थं रावणान्तकम् ॥ १॥ पञ्चमं लोकपूज्यं च षष्ठमं जानकीप्रियम् । सप्तमं वासुदेवं च श्रीरामं चाष्टमं तथा ॥ २॥ नवमं दूर्वादलश्यामं दशमं लक्ष्मणाग्रजम् । एकादशं च गोविन्दं द्वादशं सेतुबन्धनम् ॥ ३॥ द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः । दारिद्र्यदोषनिर्मुक्तो धनधान्यसमृद्धिकम् ॥ ४॥ सर्वसम्पत्प्रदं श्रेष्ठं सर्वकार्यवशीकरम् । दिव्यदेहमवाप्नोति दीर्घमायुष्यवर्धनम् ॥ ५॥ ग्रहदोष विनाशं च सर्वकार्यफलप्रदम् । अरण्ये देवसङ्ग्रामे महाभयनिवारणम् ॥ ६॥ अर्धरात्रं जपेत् स्थित्वा सर्वारिष्टनिवारणम् इहजन्मसुखी भूत्वा तद्विष्णोः परमं पदम् ॥ ७॥ इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे ब्रह्मनारदसंवादे श्रीरामद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

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