
SHREE SHARMA
237 days ago
सिन्धुसुता श्रीहरिप्रिया किन्ह संभु तप भारि। प्रगट भए परमेश्वर महादेव त्रिपुरारि।। अलख निरञ्जन औघड़दानी दीन्हे वर विष्णुपटरानी। बिल्वतरु भई त्रिभुवन माई संकरशिव सुभ माथ सुहाई।। समुद्रसुता तथा श्रीहरि की पत्नी महालक्ष्मी नें भगवान् शिव का कठोर तप किया श्रीभगवती के तप से प्रसन्न होकर त्रिपुर का अन्त करने वाले भगवान महादेव उनके समक्ष प्रकट हुए, तथा उन परम उदार महादानी अलखनिरञ्जन भगवान शिव नें विष्णुपटरानी श्रीलक्ष्मी को मनोवांछित वरदान प्रदान किया, तथा त्रिभुवन की प्रतिपालिका मातेश्वरी वहीं बिल्बवृक्ष के रूप में परिणीत होकर सदा सर्वदा के लिए बिल्वपत्र के रूप में महादेव के मस्तक की शोभा बन गई।

Comments (2)

Riya Riya 💖💖
Jan 5, 2026
jai bhole nath ji ki🙏🌹 🌿shubh sandhya vandan meri bhai🥀🙏

R k jangid phulera Jaipur
Jan 5, 2026
जय भोलेनाथ जी की🙏
