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भारतीय सेना में फील्ड मार्शल (Field Marshal) का पद सर्वोच्च सम्मान और सैन्य रैंक है। यह एक 'फाइव-स्टार' रैंक होती है, जो किसी अधिकारी को उनके असाधारण सैन्य नेतृत्व और युद्ध के समय दी गई सेवाओं के लिए दी जाती है। इस पद की सबसे विशिष्ट पहचान उनकी छड़ी (Baton) होती है, जिसका अपना एक गहरा ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक महत्व है: छड़ी (Baton) की विशेषताएँ और प्रतीक * अधिकार का प्रतीक: यह छड़ी केवल दिखावे के लिए नहीं होती, बल्कि यह फील्ड मार्शल के सर्वोच्च अधिकार और उनकी कमान का प्रतीक मानी जाती है। * डिजाइन: फील्ड मार्शल की छड़ी आमतौर पर गहरे लाल या काले रंग की होती है, जिस पर सुनहरे रंग का काम होता है। इसके ऊपरी हिस्से पर भारतीय सेना का प्रतीक (अशोक स्तंभ) और दो क्रॉस की हुई तलवारें बनी होती हैं। * परंपरा: यह परंपरा ब्रिटिश सैन्य व्यवस्था से प्रेरित है, जहाँ उच्च पदस्थ अधिकारियों को सम्मान के रूप में बैटन दिया जाता था। भारत के प्रसिद्ध फील्ड मार्शल भारतीय इतिहास में अब तक केवल दो ही अधिकारियों को इस प्रतिष्ठित पद से नवाजा गया है: * फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ (1973): उन्हें 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत का नेतृत्व करने के लिए यह रैंक दी गई थी। उनकी हाथ में छड़ी लिए हुए तस्वीरें भारतीय सैन्य गौरव का हिस्सा हैं। * फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा (1986): वे भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ थे। उनकी सेवाओं के सम्मान में उन्हें सेवानिवृत्ति के कई वर्षों बाद इस पद से सम्मानित किया गया था। महत्वपूर्ण तथ्य * जीवनभर का पद: फील्ड मार्शल कभी सेवानिवृत्त (Retire) नहीं होते। वे मृत्यु तक सेवारत माने जाते हैं और अपनी पूरी जिंदगी वर्दी पहन सकते हैं। * सैल्यूट और सम्मान: एक फील्ड मार्शल को सेना के सभी अधिकारी और जवान सैल्यूट करते हैं। प्रोटोकॉल में उनका स्थान बहुत ऊपर होता है।

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