
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
20 days ago
*🕉️11 या 12 अगस्त, कब है शिवरात्रि? जानिए सही तिथि, चारों प्रहर की पूजा का समय और भगवान शिव की* *पूजा विधि🕉️* 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱 *🪦सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस महीने में महादेव की पूजा, जलाभिषेक और शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है। सावन में आने वाली शिवरात्रि का भी बहुत महत्व है।* *इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और रात में जागकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। हालांकि, इस बार शिवरात्रि की तारीख को लेकर कुछ उलझन है। आइए जानते हैं कि शिवरात्रि कब है, और साथ ही 'चार प्रहर' (चार चरणों) की पूजा का समय और विधि क्या है।* *📿11 या 12 अगस्त: शिवरात्रि कब मनाई जाएगी?* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4:53 बजे शुरू होगी और 12 अगस्त को सुबह 1:51 बजे (देर रात) समाप्त होगी। चूंकि शिवरात्रि के लिए रात में चतुर्दशी तिथि का होना विशेष रूप से शुभ माना जाता है, इसलिए इस साल सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखना और रात में भगवान शिव की पूजा करना शुभ माना जाएगा। *📿भगवान शिव की चार चरणों ('चार प्रहर') में पूजा* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* `•सावन शिवरात्रि की रात को भगवान शिव की चार चरणों ('प्रहर') में पूजा करने की परंपरा है। चारों पहर का समय इस प्रकार है:-` * पहला पहर: शाम 7:04 बजे से रात 9:45 बजे तक * दूसरा पहर: रात 9:45 बजे से रात 12:26 बजे तक * तीसरा पहर: रात 12:26 बजे से सुबह 3:07 बजे तक * चौथा पहर: सुबह 3:07 बजे से सुबह 5:49 बजे तक *📿जलाभिषेक के लिए शुभ समय* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* * 11 अगस्त को शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:23 बजे से सुबह 6:00 बजे तक रहेगा। * अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक रहेगा। शाम को गोधूलि मुहूर्त रात 9:13 बजे से रात 9:32 बजे तक रहेगा। * इस दिन सिद्धि योग शाम 6:51 बजे तक रहेगा, जिसके बाद व्यतिपात योग शुरू होगा। अभिजीत मुहूर्त को दिन का शुभ समय माना जाता है। *📿श्रावण शिवरात्रि पर पूजा कैसे करें:* *ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ* * शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। * फिर, भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। * पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। * सबसे पहले शिवलिंग पर जल और गंगाजल चढ़ाएं। * फिर, दूध, दही, शहद, घी और चीनी से अभिषेक करें। * अंत में, साफ जल चढ़ाएं। * भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, चंदन का लेप, अक्षत (बिना टूटे चावल के दाने) और सफेद फूल चढ़ाएं। * फिर, फल, मिठाई और नैवेद्य (पवित्र भोजन का प्रसाद) चढ़ाएं। * *•'ओम नमः शिवाय'* और *महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप* करें। * शिव चालीसा का पाठ करें। भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। * पूजा के अंत में, महादेव से अपने परिवार की खुशी, शांति और अच्छे स्वास्थ्य के लिए तथा अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। अगले दिन, उचित रीति-रिवाजों के अनुसार शिवरात्रि का व्रत खोलें। *♿#हरहर_महादेव_शिवशंभू♿* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱

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