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SHREE SHARMA

67 days ago

प्रथम पंक्ति: भक्त भगवान गणेश (गजानन) से निवेदन करता है कि हे प्रभु! आपके मार्गदर्शन के बिना मुझे जीवन में कोई सही रास्ता दिखाई नहीं देता। यहाँ 'राह न सूझना' केवल भौतिक रास्ते के लिए नहीं, बल्कि जीवन की उलझनों, भ्रम और अज्ञानता के अंधेरे के लिए भी प्रयुक्त हुआ है। यह भाव दर्शाता है कि बुद्धि के देवता होने के कारण, गणेश जी ही विवेक का प्रकाश दिखा सकते हैं। द्वितीय पंक्ति: इसमें अटूट विश्वास प्रकट किया गया है कि यदि एक बार ईश्वर की कृपा दृष्टि हो जाए, तो संसार का कठिन से कठिन कार्य (काज) भी अत्यंत सरल और सुगम हो जाता है। भगवान गणेश 'विघ्नहर्ता' हैं, इसलिए उनकी कृपा मात्र से आने वाली बाधाएँ स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।

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