MyMandirInstall

3.11.2026 जीवन में तो सुख और दुख दोनों आते रहते हैं। यह दोनों का भंडार है। *"अब यह आप पर निर्भर करता है, कि आप जीवन को किस दृष्टि से देखते हैं और जीते हैं।"* *"यदि आपका चिंतन सकारात्मक है, तो आपको जीवन सुखदायक लगेगा। यदि आपका जीवन चिंतन नकारात्मक है, तो आप सदा दुखी रहेंगे।"* सकारात्मक चिंतन -----> *"ईश्वर ने मुझे बहुत कुछ दिया है। माता-पिता गुरुजन और समाज के लोगों ने मेरा बहुत सहयोग किया है। मैं बहुत भाग्यशाली हूं, और बहुत आनंद में हूं।"* नकारात्मक चिंतन ------> *"यह क्या जिंदगी है। न अच्छे कपड़े हैं, न अच्छा मकान है। न अच्छी वस्तुएं हैं। कोई मेरी सुनता नहीं, कोई मुझे सहयोग नहीं देता। यह संसार बेकार है।"* *"ऊपर बताया सकारात्मक चिंतन रखें, वैसा ही पुरुषार्थ करें, और सदा सुखी रहें।"* --- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़ गुजरात।"*

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!