
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
25 days ago
### द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र: भगवान शिव के १२ दिव्य स्वरूपों की महिमा और भक्ति का पावन स्वरूप भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र, जागृत और ऊर्जा के केंद्र माने जाते हैं। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित **'द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र'** इन सभी बारह पावन धामों का स्मरण कराने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली और फलदायी स्त्रोत है। इस स्तोत्र के प्रतिदिन स्मरण से न केवल मानसिक शांति की प्राप्ति होती है, बल्कि भगवान शिव की कृपा से समस्त कष्टों और पापों का नाश भी होता है। ### द्वादश ज्योतिर्लिंगों के नाम और उनके पावन स्थान आदि शंकराचार्य के इस प्रसिद्ध श्लोक में सभी बारह ज्योतिर्लिंगों के स्थानों का सुंदर वर्णन मिलता है: > सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। > उज्जयिन्यां महाकालमाहंकारं च वैद्यनाथम्।। > डाकिन्यां भीमशंकचं सेतुबन्धे तु रामेश्वरम्। > नागेशं दारुकावने वाराणसीयां च विश्वेश्वरम्।। > त्र्यम्बकं गौतमीतटे च हिमालय तु केदारम्। > घुश्मेशं च शिवालाये एतानि ज्योतिर्लिंगानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्। > सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति।। > | क्र.सं. | ज्योतिर्लिंग का नाम | भगवान शिव का स्वरूप | वर्तमान भौगोलिक स्थिति (स्थान) | |---|---|---|---| | **1.** | **सोमनाथ** | चन्द्रमा द्वारा पूजित प्रथम ज्योतिर्लिंग | प्रभास पाटन, सौराष्ट्र (गुजरात) | | **2.** | **मल्लिकार्जुन** | माता पार्वती और शिव का संयुक्त स्वरूप | श्रीशैल पर्वत, कुरनूल जिला (आंध्र प्रदेश) | | **3.** | **महाकाल** | काल के भी नियंत्रक और महाकालेश्वर | उज्जैन (मध्य प्रदेश) | | **4.** | **ओमकारेश्वर** | ॐकार ध्वनि का प्रतीक ज्योतिर्लिंग | नर्मदा नदी के मांधाता तट (मध्य प्रदेश) | | **5.** | **वैद्यनाथ** | आरोग्य और रोगों के निवारक वैद्य रूप | देवघर (झारखंड) / परळी वैजनाथ (महाराष्ट्र)* | | **6.** | **भीमशंकर** | शत्रुओं और बाधाओं का नाश करने वाले | भीमाशंकर, पुणे (महाराष्ट्र) | | **7.** | **रामेश्वरम्** | भगवान राम द्वारा स्थापित सेतुबंध तीर्थ | रामेश्वरम, द्वीप (तमिलनाडु) | | **8.** | **नागेश्वर** | नागों के देवता और विषनाशक स्वरूप | औंधा नागनाथ / द्वारका (गुजरात) | | **9.** | **विश्वेश्वर (विश्वनाथ)** | संसार के अधिपति और मोक्षदाता | वाराणसी / काशी (उत्तर प्रदेश) | | **10.** | **त्र्यंबकेश्वर** | तीनों वेदों व नदियों के उद्गम स्थल के पास | गोदावरी तट, त्र्यंबक, नासिक (महाराष्ट्र) | | **11.** | **केदारनाथ** | हिमालय की गोद में स्थित मोक्षधाम | केदार घाटी, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड) | | **12.** | **घुश्मेश्वर (घृष्णेश्वर)** | भक्ति और करुणा के प्रतीक अंतिम ज्योतिर्लिंग | वेरूल गांव, एलोरा के पास (महाराष्ट्र) | *(नोट: वैद्यनाथ और नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के स्थान को लेकर पारंपरिक रूप से कुछ अन्य मान्यताएं भी हैं, किंतु उपर्युक्त स्थान सबसे अधिक स्वीकृत और मान्य हैं।)* ### द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ और उसका महत्व प्रातः काल उठकर इन बारह ज्योतिर्लिंगों के नामों का स्मरण करने मात्र से जीवन के बड़े-बड़े संकट दूर हो जाते हैं। स्तोत्र के अंतिम पंक्ति में स्पष्ट कहा गया है: > *"एतानि ज्योतिर्लिंगानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥"* > **अर्थात्:** जो मनुष्य सुबह उठकर इन बारह ज्योतिर्लिंगों का पाठ या स्मरण करता है, उसके सात जन्मों तक के पाप केवल स्मरण मात्र से नष्ट हो जाते हैं। भगवान शिव की यह दिव्य शृंखला मनुष्य को अहंकार से मुक्त कर आध्यात्मिकता, दिव्यता और आंतरिक शांति की ओर ले जाती है। ॐ नमः शिवाय!
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