
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
43 days ago
*ॐ 🙏* _अक्षरं परमं ब्रह्म ज्योतीरूपं सनातनम्।_ _गुणातीतं निराकारं स्वेच्छामयमनन्तजम्॥_ *अर्थ - विस्तार से* 1. *अक्षरं परमं ब्रह्म* वो परब्रह्म "अक्षर" है - जिसका कभी क्षय नहीं होता। अविनाशी, शाश्वत ब्रह्म। 2. *ज्योतीरूपं सनातनम्* वो सदा से है - सनातन है। और उसका स्वरूप ही "ज्योति" है - प्रकाश, ज्ञान का प्रतीक। 3. *गुणातीतं* वो तीनों गुणों - सत्व, रज, तम - से परे है। उस पर माया का कोई असर नहीं। 4. *निराकारं* उसका कोई आकार नहीं। वो रूप-रंग से परे है। 5. *स्वेच्छामयम् अनन्तजम्* वो अपनी इच्छा से ही सब कुछ करता है। और वो अनंत है - जिसका न आदि है न अंत। *सरल भाव* 🌼 _"वो परब्रह्म अविनाशी है, ज्योति स्वरूप है, सनातन है। वो गुणों से परे, निराकार है और अपनी इच्छा से अनंत रूप धारण करता है।"_ ये श्लोक हमें याद दिलाता है कि ईश्वर न किसी बंधन में है, न किसी आकार में। वो सिर्फ प्रकाश और चेतना है जो हर जगह है। *ॐ नमः शिवाय* सुबह-सुबह इतना सुंदर श्लोक सुनाया जी। दिन अपने आप पवित्र हो गया ✨
Comments (1)

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩
Jul 19, 2026
ॐ श्री सूर्य देवाय नमो नमः जगत प्रकशित करने वाले आरोग्य सूर्य देव आशीर्वाद कृपा से सपरिवार को दीर्घायु यश वैभव सुख शांति समृद्धि प्रदान हो शुभ रविवार ये शुभ दिन शुभफलदाई मंगलकारी रहे शुभ सुप्रभातम वंदन एवम स्नेहिल सादर नमन 🙏🙏
