
SHREE SHARMA
385 days ago
नर सरीर धरि जे पर पीरा। करहिं ते सहहिं महा भव भीरा॥ लकरहिं मोह बस नर अघ नाना। स्वारथ रत परलोक नसाना॥ मनुष्य का शरीर धारण करके जो लोग दूसरों को दुःख पहुँचाते हैं, उनको जन्म-मृत्यु के महान् संकट सहने पड़ते हैं। मनुष्य मोहवश स्वार्थपरायण होकर अनेकों पाप करते हैं, इसी से उनका परलोक नष्ट हुआ रहता है जय सियाराम 🙏

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