
SHREE SHARMA
69 days ago
"डमरू बाजे प्रेम का, थिरके सारा मौन" इस पंक्ति का गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। जब भगवान शिव का डमरू बजता है, तो उससे निकलने वाली ध्वनि केवल एक नाद नहीं, बल्कि साक्षात् प्रेम की अभिव्यक्ति है। इस अलौकिक प्रेम की गूंज इतनी गहरी है कि सृष्टि का जो 'मौन' (शांत, स्थिर और जड़ हिस्सा) है, वह भी आनंदित होकर झूमने और थिरकने लगता है। सरल शब्दों में कहें तो, शिव के प्रेम में इतनी शक्ति है कि वह शांत से शांत हृदय में भी भक्ति का संगीत जगा देता है। "शिव जैसा दानी भला, इस दुनिया में कौन" इस पंक्ति में शिव के 'औढरदानी' (शीघ्र प्रसन्न होकर सब कुछ दान कर देने वाले) स्वरूप की महिमा गाई गई है। इस पूरे संसार में शिव जैसा बड़ा और निस्वार्थ दानी कोई दूसरा नहीं है। वे इतने उदार हैं कि जो विष (हलाहल) संसार को नष्ट कर सकता था, उसे उन्होंने स्वयं पी लिया और बदले में पूरी सृष्टि को अमृत और जीवन दान दिया। वे अपने भक्तों की साधारण सी भक्ति से भी प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा वरदान दे देते हैं, बिना यह सोचे कि मांगने वाला कौन है। उनका यह त्याग और दानशीलता अतुलनीय है।

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