
SHREE SHARMA
430 days ago
भगवान श्रीकृष्ण भगवान शिवसे कहते हैं, - सकृदावां प्रपन्नो वा मत्प्रियिमेकिकां सुत। सेवतेऽनन्यभावेन स मामेति न संशय: ।। जो मेरे और मेरी प्रिया श्रीराधारानीकी शरणमें आकर अनन्यभावसे सेवा करता है, वह नि:सन्देह मुझे प्राप्त होता है। यो मामेव प्रपन्नश्च मत्प्रियां न महेश्वर। न कदापि स चाप्नोति मामेवं ते मयोदितम्।। हे महेश्वर ! जो केवल मेरी शरणमें आता है किन्तु मेरी प्रियाकी शरणमें नहीं आता, - वह मुझे कभी प्राप्त नहीं होता। सकृदेव प्रपन्नो यस्तवास्मीति वदेदति। साधनेन विनाप्येव मामाप्नोति न संशय: ।। जो एक बार हम दोनोंके शरणमें आकर, " मैं आप दोनोंके शरणमें हूॅं" - ऐसा कहता है, वह कोई साधन के बिना ही मुझे प्राप्त कर लेता है- इसमें कोई सन्देह नहीं। तस्मात् सर्वप्रयत्नेन मत्प्रियां शरणं व्रजेत। आश्रित्य मत्प्रियां रुद्र मां वशीकर्तुमर्हसि ।। अत: हे रुद्र ! मुझे वशमें करने के लिये सब प्रकार से प्रयत्न करके मेरी प्रिया श्री राधारानी की शरण ग्रहण करें। 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 ॐ श्रीराधाकृष्णाभ्याम् नम: 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jun 26, 2025
Jai Shree Krishna 🙏 Radhe Radhe 🙏 Subh Dopahar Jii 🙏🌹🌹
