MyMandirInstall

> *पानी बचाया जा सकता है, लेकिन बनाया नहीं जा सकता।* > *दादा जी ने नदी में पानी देखा। पिता जी ने कुएं में। हमने नल में देखा। बच्चों ने बोतल में। अब उनके बच्चे कहाँ देखेंगे?* > *जरूर विचार करें एवं पानी को व्यर्थ न करें।* *1. पहली लाइन सबसे बड़ी सच्चाई है —* सोना, चाँदी, अनाज हम बना सकते हैं, फैक्ट्री में बना लेंगे। पर पानी? वैज्ञानिक लाख कोशिश कर लें, एक बूंद असली पानी प्रयोगशाला में नहीं बना सकते। जो पानी है, वही आखिरी है। वही घूम-घूम कर आता है। *2. 4 पीढ़ियों में पानी की कहानी कैसे बदली —* - *दादा जी ने नदी में देखा:* उस समय नदियां भरी रहती थीं, लोग नदी से सीधा पानी पी लेते थे। पानी मुफ्त और बेहिसाब था। - *पिता जी ने कुएं में देखा:* नदियां कम हुईं तो इंसान ने जमीन खोदकर कुएं बनाए। पानी थोड़ा गहरा हो गया, मेहनत से निकालना पड़ता था। - *हमने नल में देखा:* कुएं भी सूख गए। अब सरकार नल से पानी देती है, वो भी समय पर। कई जगह टैंकर से आता है। - *बच्चों ने बोतल में देखा:* अब हमारे बच्चों को लगता है पानी बोतल में बनता है, दुकान से आता है। 20 रुपये की बोतल। मुफ्त की चीज सबसे महंगी बिकने लगी। *3. अब उनके बच्चे कहाँ देखेंगे? —* ये सवाल डराने वाला है। अगर ऐसे ही पानी बहाते रहे, नल खुला छोड़ दिया, तो अगली पीढ़ी पानी सिर्फ फोटो में या कहानियों में देखेगी। आँसुओं में भी पानी नहीं बचेगा। *हम क्या कर सकते हैं जी?* - नल को जरूरत होने पर ही खोलें, ब्रश करते समय बंद रखें। - RO का बेकार पानी पौधों में डालें, फेंके नहीं। - छत के पानी को इकट्ठा करें, पेड़ लगाएं। - बच्चों को सिखाएं कि बोतल में नहीं, प्रकृति में पानी होता है। *याद रखिए जी —* एक बूंद पानी बचाना, एक जान बचाने के बराबर है। आज पानी बचाएंगे, तो कल हमारे बच्चे जी पाएंगे।

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!