
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
285 days ago
इस चमन से जुदा हुआ एक गुलाब हूँ मैं, खुद अपनी ही तबाही का जवाब हूँ मैं। जिसे तूने रौंदा था खिलने से पहले ही, उस अधूरे ख्वाब की आफ़ताब हूँ मैं। तेरी ज़ुल्फ़ों की छाँव को जो खुदा समझा, आज उसी धोखे में बेताब हूँ मैं। तेरी महफ़िल में हँसी थी मेरी बर्बादी, अब उसी हँसी का हिसाब हूँ मैं। दिल जो तुझ पर लुटाया था बेझिझक कभी, अब उसी दिल की सुलगती किताब हूँ मैं। तेरे झूठे वादों का हर लफ़्ज़ ज़हर निकला, और उसी ज़हर से बेहिसाब हूँ मैं। तू जब आई थी तो लगा खुदा मिल गया, अब खुदा से भी सवालों का ख़िताब हूँ मैं। अब किसी दुआ में मेरा नाम नहीं होता, तेरी बेवफाई से लापता नक़्श-ए-ख़्वाब हूँ मैं। यूँ नजरे न फेर मुझसे, ऐ मेरे सनम, तेरी चाहतों में ही बर्बाद हुआ हूँ मैं।. 🙏 शुभप्रभात जी 🙏
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
