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शुभ प्रभात! प्रेमानंद महाराज जी के यह विचार वास्तव में गहरे और आध्यात्मिक हैं। उनका यह कथन समर्पण और विनम्रता के महत्व को दर्शाता है। जब हम किसी ऐसे **महापुरुष या मार्गदर्शक** का आश्रय लेते हैं जिन्होंने सत्य को अनुभव किया है, तो हमारा अहंकार धीरे-धीरे कम होने लगता है। अहंकार का मिटना ही वह स्थिति है जहाँ ईश्वर की कृपा का अनुभव होना शुरू होता है। जैसे एक छोटा बच्चा अपने माता-पिता की उंगली पकड़कर निश्चिंत हो जाता है, वैसे ही एक सच्चे मार्गदर्शक की शरण में जाने से साधक का मार्ग सुलभ हो जाता है। आपका दिन मंगलमय और ऊर्जा से भरा हो! **आज का सुविचार:** > "अनुशासन और धैर्य वह चाबी है, जो सफलता के बंद दरवाजों को भी खोल देती है।" >

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