
SHREE SHARMA
331 days ago
#सीताकी_अग्नि_परीक्षा रावणकी अन्त्येष्टि तथा विभीषणका लंकाके राज्यसिंहासनपर अभिषेक हो जानेके बाद कपिश्रेष्ठ हनुमान्जीने श्रीरामको प्रणाम करके कहा— 'भगवन् ! जिनके लिये लंकाका यह घोर संग्राम हुआ, उन शोकसंतप्त मिथिलेशकुमारी सीताजीको अब आप शीघ्र दर्शन देनेकी कृपा करें। उनके नेत्र आँसुओंसे डबडबाये हुए हैं। आपकी विजयका समाचार सुनकर वे आपका शीघ्र दर्शन करना चाहती हैं।' हनुमान्जीके ऐसा कहनेपर धर्मात्माओंमें सर्वश्रेष्ठ श्रीराम क्षणभरके लिये सहसा ध्यानस्थ हो गये। उनकी आँखें छलक पड़ीं। फिर उन्होंने विभीषणये कहा— 'लंकापति ! आप विदेहकुमारी सीताको दिव्य अङ्गराग और सुन्दर आभूषणोंसे भूषित करवाकर मेरे पास ले आयें।' विभीषणके संदेश देनेपर श्रीसीताजी सुन्दर श्रृङ्गार करके एवं बहुमूल्य आभूषण पहनकर चलनेके लिये तैयार हो गयीं। फिर विभीषणजी सीताजीको शिविकायें बिठाकर ले आये और श्रीरामको प्रणाम करके बोले— 'प्रभो ! सीतादेवी आपके आदेशानुसार यहाँ आ गयी हैं। अब आपकी क्या आज्ञा है ?' भगवान् श्रीरामने कहा— 'मित्र ! तुम विदेहकुमारीसे कहो कि वे शीघ्र मेरे पास आयें।' फिर विभीषणके आदेशसे राक्षस-सैनिक रास्तेके दोनों ओर खड़े वानरों और रीछोंको छड़ी लेकर हटाने लगे। उस समय श्रीरामने विभीषणसे रोषपूर्वक कहा कि 'सीताको पालकीसे उतारकर उनको पैदल ही मेरे पास लाओ। सीता इस समय मेरे पास आ रही हैं। उनका परदेके बिना यहाँ सबके सामने आना दोषकी बात नहीं है। सभी वानरगण उनका दर्शन करेंगे।' फिर विभीषण सीताजीको पालकीसे उतारकर श्रीरामके पास ले आये। सीताजीने बड़े विस्मय और हर्षके साथ अपने स्वामीके मनोहर मुखका दर्शन किया। श्रीरामके दर्शनसे सीताजीकी विरहजनित सारी पीड़ा दूर हो गयी और उनका मन प्रसन्नतासे खिल उठा। मिथिलेशकुमारी सीताको विनयपूर्वक अपने समीप खड़ी देखकर श्रीरामने कहा— 'प्रिये ! समरमें मैंने शत्रुको पराजित करके तुम्हें उसके चंगुलसे छुड़ा लिया। मुझपर जो कलंक लगा था, उसको मैंने धो डाला। अपने तिरस्कारका बदला चुकानेके लिये मनुष्यका जो कर्तव्य है, वह सब मैंने मानरक्षाकी अभिलाषासे रावणका वध करके पूर्ण किया। तुम्हें मालूम होना चाहिये कि यह सब मैंने दैववश लगे अपने कलंकको मिटानेके लिये किया। अब तुम मेरी ओरसे स्वतन्त्र हो। तुम इच्छानुसार जहाँ चाहो चली जाओ। मेरा तुमसे कोई प्रयोजन नहीं है।' भगवान् श्रीरामकी कठोर बातोंसे पीड़ित होकर सीताजीने अपनी आँखोंमें आँसू भरकर कहा— 'प्रभो ! मैं अपने सदाचारकी सौगन्ध खाकर कहती हूँ कि मैं संदेहके योग्य नहीं हूँ। रावणके स्पर्शके पीछे मेरी विवशता थी, स्वेच्छासे मैंने ऐसा नहीं किया था। आपने मेरा त्याग करके मेरे पातिव्रतको अपमानित किया है। अब मैं एक क्षण भी जीवित नहीं रहना चाहती, अतः अग्निमें प्रवेश करूँगी। यदि मैंने कभी भी आपके अतिरिक्त किसी पर-पुरुषका चिन्तन नहीं किया है तो अग्निदेव मेरी रक्षा करेंगे।' ऐसा कहकर सीताजी लक्ष्मणके द्वारा जलायी गयी चिताकी अग्निमें समा गयीं। इस करुण दृश्यको देखकर सभी लोग हाहाकार करने लगे। उसी समय उस जलती हुई चितासे सीताजीको पिताकी भाँति गोदमें लेकर अग्निदेव प्रकट हुए। उन्होंने कहा— 'श्रीराम ! विदेहकुमारी सीताने कभी मनसे भी पर-पुरुषका चिन्तन नहीं किया है। ये मन, वाणी और शरीरसे सर्वथा शुद्ध हैं। मैं आपको आज्ञा देता हूँ कि आप इन्हें स्वीकार करें।' भगवान् श्रीरामने कहा— 'अग्निदेव ! मैं जानता हूँ कि सीतामें कभी कोई दोष नहीं आ सकता। यह परीक्षा तो मात्र लोगोंको दिखानेके लिये थी।' ऐसा कहकर श्रीरामने सीताजीको प्रसन्नमनसे स्वीकार कर लिया। 🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿🍂☘️🌿

Comments (7)

Rama Devi Sahu
Oct 3, 2025
🙏🙏🌹❤️🌹🙏🙏

Rama Devi Sahu
Oct 3, 2025
Prabhu Shri Ram Ji ki Aasirbad Aap or Aap ke Pure Parivar ko Hamesha Sukh Shanti or Samriddhi Pradan Kare 🙏 Aap ka Har Pal Subha Mangalmay Ho 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Oct 3, 2025
Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 Ram Siya ki Prasanga Bahut hi Sundar Lad raha hai.... Jai Ho Mata Sita ki 🙏🙏🌹

Radhe Radhe
Oct 3, 2025
🌹🌹आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जी भाई जी।। ््््््ॐ शुभ संध्या की हार्दिक शुभकामनाएं अति सुंदर वेरी नाइस पोस्ट की जय श्री रामजी।।🌹🌹

Radhe Radhe
Oct 3, 2025
🚩🔻शुभ शुक्रवार जय माता दी <>जय मां अंबे _जगदंबे _जय मां सरस्वती माता _मां लक्ष्मी जी _एवं मां संतोषी माता जी_) की कृपा दृष्टि सदैव आप और आपके परिवार पर बनी रहे।। आपका हर एक पल खुशियों से भरा रहे !इसी मनोकामनाके साथ शुभ संध्या की शुभकामनाएं |||||||•जी भाई जी•||||||।।🔻🌷

Saumya Sharma
Oct 3, 2025
जय श्री लक्ष्मीनारायण जी 🙏🌹☺️ आपको पापांकुशा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🌹☺️ ठाकुर जी की कृपा से आप सपरिवार सदैव स्वस्थ और खुशहाल रहें 🙏🌹☺️ इसी शुभकामना के साथ शुभ दोपहर वंदन 🙏🌹☺️
