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*🌹देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत, जानें पूजा-पाठ और नियमों का महत्व🌹* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *⭕देवशयनी एकादशी 2026: सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है. इस दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ माना जाता है. आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी.* *⚜️तिथि और शुभ मुहूर्त* *卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐* *🚩एकादशी तिथि प्रारंभ:-* 24 जुलाई 2026, सुबह 09:12 बजे *🚩एकादशी तिथि समाप्त:-* 25 जुलाई 2026, सुबह 11:34 बजे *🚩उदया तिथि के अनुसार व्रत:-* 25 जुलाई 2026 (शनिवार) *🚩व्रत पारण:-* द्वादशी तिथि में नियमानुसार `•पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त और प्रातःकाल शुभ माना गया है.` *🪔क्या है देवशयनी एकादशी?* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है. मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर योगनिद्रा में चले जाते हैं. इसके बाद चार माह तक चलने वाले चातुर्मास का आरंभ होता है. यह अवधि आध्यात्मिक साधना, संयम और भक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. भगवान विष्णु की योगनिद्रा का गहरा संदेश, आत्मचिंतन और आत्मविकास का पावन अवसर है। *🪔धार्मिक महत्व और मान्यता* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 शास्त्रों में वर्णित है कि देवशयनी एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से पापों का क्षय होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. इस दिन भक्त शंख, तुलसी दल, नारियल, फल, पुष्प और पीले वस्त्र अर्पित कर भगवान विष्णु का पूजन करते हैं. श्रद्धापूर्वक किए गए व्रत और मंत्र जाप से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है. *🪔देवशयनी एकादशी पूजा-विधि* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 प्रातः स्नान के बाद घर और मंदिर की साफ-सफाई करें. भगवान विष्णु का जल, गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद पीला चंदन, पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें. घी का दीपक जलाकर आरती करें तथा *•"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"* मंत्र का जाप करें. श्रद्धानुसार व्रत रखने का संकल्प लें और व्रत कथा का पाठ करें. अंत में भगवान को केला या पंचामृत का भोग अर्पित कर क्षमा प्रार्थना करें. *🪔चातुर्मास का महत्व* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है. सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के चार महीने धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माने जाते हैं. इस अवधि में दान-पुण्य, जप, तप और भक्ति का विशेष महत्व होता है. कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागृत होते हैं और चातुर्मास का समापन होता है. इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का भी विशेष महत्व बताया गया है. देवशयनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, संयम और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का पावन अवसर है. श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है. *🚩#हरिऊँ🚩* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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Comments (1)

शिवानी

शिवानी

Jul 25, 2026

राधे राधे